मेरी मोहब्बत को समझते हो तुम ग़लत, ग़लत नहीं है तुमको चाहा है मैंने अगर इसमें कुछ ग़लत नहीं है दिखा दो तुम कोई अपना-सा इस ज़माने में मुझको मैं अगर फिर चाह लूँ उसको इसमें कुछ ग़लत नहीं है आँखों को मेरी … more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 10 months ago: मेरी मोहब्बत को समझते हो तुम ग़लत, ग़लत नहीं है तुमको चाहा है मैंने अगर इसमें कुछ ग़लत नहीं है दिखा … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: हम बहुत कुछ कहना चाहते है | रोज हमारे भीतर नई-नई बातें जन्म लेती रहती है | कई बाते ऐसी भी होती है जि … more →