उसे प्यार करने में मै अपना घर जला बैठा खुद अपने ही सीने पे एक नश्तर चला बैठा हर बार सोचता था बदलूंगा आप को हर बार उसी भूल का खंजर चला बैठा जब भी जताया हक़, हक़ से मै जल गया एक बार नहीं हाथ मै अक़्सर जला … more →
इक शायर अंजाना सा...Rohit Jain wrote 1 year ago: उसे प्यार करने में मै अपना घर जला बैठा खुद अपने ही सीने पे एक नश्तर चला बैठा हर बार सोचता था बदलूंगा … more →