जान कर भी नही जानती समझकर भी नही समझती दूर से ही होती है अपनी मुलाकात नज़रो ही नज़रों में होती है बात तेरी हँसी ,मेरे लबो पर आए तेरे आँसुओं से मेरे नयन भर जाए महसूस करती हूँ सांसो को ते… more →
mehhekk wrote 1 year ago: जान कर भी नही जानती समझकर भी नही समझती दूर से ही होती है अपनी मुलाकात नज़रो ही नज़रों में होत … more →
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