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Blogs about: एक

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एक बचपन उसने जिया (बाल दिवस विशेष)2 comments

Nidhi KM wrote 2 weeks ago: एक कमरा सपनो  भरा, फर्श मखमली, छत सितारों भरीं, दीवारें रंगों सजीं, खिड़कियाँ फूलों रंगीं, सपने कहीं … more →

Tags: कविताएँ, कुछ पंक्तियाँ, छनिकाएँ, 14 November, आकाश, खिड़कि, छत, छाँव, ज़मीन

एक काव्यात्मक गुस्ताखी3 comments

Rohit Jain wrote 1 year ago: आपकी अमूल्य टिप्पणी का मुंतज़िर हूँ… ———————— … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2008 A Poetic Journey, Mar 2008, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain

छोटी बहर में एक प्रयोग3 comments

Rohit Jain wrote 1 year ago: छोटी बहर में एक प्रयोग करने की गुस्ताख़ी की है आपकी अमूल्य टिप्पणी का मुंतज़िर हूँ…. =========== … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2007 A Poetic Journey, Jul 2007, में, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit

हम भी जिगर पे इख़्तियार रख लेंगे1 comment

Rohit Jain wrote 1 year ago: हम भी जिगर पे इख़्तियार रख लेंगे बंद आँखों में छुपा के प्यार रख लेंगे एक पल क्या है तू जो कह दे तो तम … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2008 A Poetic Journey, Feb 2008, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain

सब्र हम यूँ इख़्तियार करते हैं1 comment

Rohit Jain wrote 1 year ago: सब्र हम यूँ इख़्तियार करते हैं होता नहीं है बेक़ार करते हैं हमको मालूम है वो है बेवफ़ा फिर भी हम ऐतबार … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2008 A Poetic Journey, Feb 2008, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain

निगाहों के आसपास

Rohit Jain wrote 1 year ago: कुछ ख्वाब सजा रखे हैं निगाहों के आसपास कुछ गुल खिला रखे हैं निगाहों के आसपास तू मुत्तसिल हो तो ही तो … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2008 A Poetic Journey, Feb 2008, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain

बेबाक हुस्न देखा तेरी क़ज़-अदाएं देखीं

Rohit Jain wrote 1 year ago: बेबाक हुस्न देखा तेरी क़ज़-अदाएं देखीं एक पल में ही जहाँ की सारी बलाएं देखीं कभी आसमां में इतने बादल न … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2008 A Poetic Journey, Feb 2008, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain

एक पल में ही हज़ारों मुद्दतों की बात हो1 comment

Rohit Jain wrote 1 year ago: एक पल में ही हज़ारों मुद्दतों की बात हो ज़हन में जो ले रहीं उन करवटों की बात हो आओ बोलें प्यार के इख़ला … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2008 A Poetic Journey, Feb 2008, पल, में, ही, हज़ारों, मुद्दतों, की

बस एक बार मिली थी नज़र

Rohit Jain wrote 1 year ago: बस एक बार मिली थी नज़र, देखो अब आया होश हमें कुछ और जी लेते खवाबों में, यूँ बेसबब आया होश हमें हाल-ए- … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2007 A Poetic Journey, Aug 2007, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain


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