हम दोस्ती एहसान वफ़ा भूल गए है, जिंदा तो है जीने की अदा भूल गए है, हम दोस्ती एहसान वफ़ा भूल गए है, खुशबु जो लुटाती है मसलती है उसी को, एहसान का बदला यही मिलता है कली को, एहसान तो लेते है सिला भूल गए है,… more →
कुछ पल जगजीत सिंह के नामShubhashish Pandey wrote 1 year ago: मन को है तुझे देखने की प्यास तूझ बिन बेचैन है मेरी हर एक सांस उस एक क्षण के लिए छोड॰ सकता हूं ये जहा … more →
विनय wrote 1 year ago: यह कैसा लम्हा है यह कैसा एहसास है तू पलकों में क़ैद है दिल के पास है क्या देखूँ तेरे सिवा क्या चाहूँ … more →
विनय wrote 1 year ago: रक़ाबी चाँद जला दो यह रात चाँदनी हो जाये कभी तो पास बुला लो तेरी नज़दीकियों का मुझे एहसास हो जाये गुला … more →
विनय wrote 1 year ago: जानते हैं दर्द बुझते हुए चाँद का जब बढ़ते आते हैं सुबह के क़दम जुस्त-जू की छाया खो जाती है कहीं चाँद … more →
विनय wrote 1 year ago: पहली बार देखा तुमको जाने क्या हुआ दिल की धड़कनों का हल्का-हल्का एहसास हुआ डूब गया मैं तेरी आँखों में … more →
विनय wrote 1 year ago: रहते हैं हम जिन ख़ाबों में उन ख़ाबों का एहसास तुम हो रह जायें जो साँसें तन में बाक़ी उन साँसों की ख़ा … more →
mehhekk wrote 1 year ago: एहसास एक भावना,एक माध्यम है कुछ पाने और कुछ खोने का कभी ना कर सकी इस भावना का इज़हार और ना ही कभी … more →
Amarjeet Singh wrote 2 years ago: हम दोस्ती एहसान वफ़ा भूल गए है, जिंदा तो है जीने की अदा भूल गए है, हम दोस्ती एहसान वफ़ा भूल गए है, खुश … more →
विनय wrote 2 years ago: बारिश, बूँदें, पत्ते, मिट्टी -सौंधी रात, चाँद, तारे, निगाह -मेरी मरासिम लफ़्ज़ों से नहीं होते एहसास से … more →
विनय wrote 2 years ago: रूह बहुत बेक़रार’ बहुत बेकल है इस जिस्म से छुटकारा चाहती है अगर तुम न मिली मुझको… यह बेक़र … more →
विनय wrote 2 years ago: तुम्हें महसूस हो कि ना हो मेरे सीने में दर्द है तो सही… लम्हा-लम्हा जज़्बात पिघलते हैं ग़म की चि … more →