कभी तुम घर आओ ना नाम से मुझे बुलाओ ना हमें यह वादा दे दो आओ तो फिर जाओ ना अपनी हँसी से यह घर सजा दो प्यार के फूल दिल में खिला दो दीप मन में जलाओ ना कभी तुम घर आओ ना नाम से मुझे बुलाओ ना फेरे यह ऐंवे क… more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 1 year ago: कभी तुम घर आओ ना नाम से मुझे बुलाओ ना हमें यह वादा दे दो आओ तो फिर जाओ ना अपनी हँसी से यह घर सजा दो … more →