उन ओस की बूँदो का आना लालिमा की चुनर पूरब पर लहराए मंद मंद बहती ये शीतल हवाए खिली कुसुमीता मध्यम मुस्कुराए फ़िज़ाए जब उसे छूकर गुजरती अपनी महक हर दिशा में बिखराए छम छम करती किरनो की पायल रौशन करती जीव… more →
mehekmehhekk wrote 1 year ago: उन ओस की बूँदो का आना लालिमा की चुनर पूरब पर लहराए मंद मंद बहती ये शीतल हवाए खिली कुसुमीता मध्यम मुस … more →