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और भी काम हैं ज़माने में3 comments

Rohit Jain wrote 1 year ago: बहुत दिनों से ग़ैरहाज़िर हूँ जिसके लिये माफ़ीगुज़ार हूँ. अपनी हालत बयां करने के लिये एक फ़ैज़ साहब का शेर … more →

Tags: 2008 A Poetic Journey, मेरी गज़लें, Sep 2008, 2008, कविता, काम, गज़ल, जैन, भी

आज तक जो भी हुआ प्रस्तावना है4 comments

Rohit Jain wrote 1 year ago: आपको अब भी बहुत कुछ देखना है आज तक जो भी हुआ प्रस्तावना है चाँद तक जाने की राहें खोज लीं दिल से दिल … more →

Tags: 2008 A Poetic Journey, apr 2008, मेरी गज़लें, 2008, APR, April, आज, कविता, गज़ल

और नहीं1 comment

Rohit Jain wrote 1 year ago: मरने की दुआ दे दो हमको जीने का तमाशा और नहीं इस रंज मुसीबत ग़म से भरी दुनिया की तमन्ना और नहीं साहिल … more →

Tags: 2008 A Poetic Journey, apr 2008, मेरी गज़लें, 2008, APR, April, कविता, कोई, गज़ल

रात सूनी सूनी है और सहर खामोश है

Rohit Jain wrote 1 year ago: रात सूनी सूनी है और सहर खामोश है तुम चले गये तो सारा शहर खामोश है कैसा तन्हा है समाँ ताज़ीर-ए-खामोशी … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2007 A Poetic Journey, Feb 2007, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain


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