बहुत दिनों से ग़ैरहाज़िर हूँ जिसके लिये माफ़ीगुज़ार हूँ. अपनी हालत बयां करने के लिये एक फ़ैज़ साहब का शेर अर्ज़ कर रहा हूँ - दुनिया ने तेरी याद से बेग़ाना कर दिया तुझसे भी दिलफ़रेब हैं ग़म रोज़गार के एक नई ग़ज़ल ल… more →
इक शायर अंजाना सा...Rohit Jain wrote 1 year ago: बहुत दिनों से ग़ैरहाज़िर हूँ जिसके लिये माफ़ीगुज़ार हूँ. अपनी हालत बयां करने के लिये एक फ़ैज़ साहब का शेर … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: आपको अब भी बहुत कुछ देखना है आज तक जो भी हुआ प्रस्तावना है चाँद तक जाने की राहें खोज लीं दिल से दिल … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: मरने की दुआ दे दो हमको जीने का तमाशा और नहीं इस रंज मुसीबत ग़म से भरी दुनिया की तमन्ना और नहीं साहिल … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: रात सूनी सूनी है और सहर खामोश है तुम चले गये तो सारा शहर खामोश है कैसा तन्हा है समाँ ताज़ीर-ए-खामोशी … more →