एक ही रास्ता जब है दोनों का फिर क्यों दोनों तन्हा फिर क्यों दोनों तन्हा मेरा मरहम है तू मेरा मज़हब है तू आँखों में तेरा ही चेहरा कंचन भी तू है चंदन भी तू है दिल चाहे तेरा ही रहना एक ही रास्ता जब है दोन… more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 1 year ago: एक ही रास्ता जब है दोनों का फिर क्यों दोनों तन्हा फिर क्यों दोनों तन्हा मेरा मरहम है तू मेरा मज़हब है … more →