अविस्मरणीय, कम से कम मेरे लिये तो है ही ! दूसरे भभकी देते हों..शेख़ी बघारते हों या कि कुछ और..लेकिन मैं यह नहीं कह सकता कि मैंने दुनिया देखी है, क्यॊकि मेरे लिये अब तक दुनिया के रंग गिन पाना ही कठिन है… more →
बस, सिर्फ़ दो मिनट..डा० अमर कुमार wrote 1 year ago: अविस्मरणीय, कम से कम मेरे लिये तो है ही ! दूसरे भभकी देते हों..शेख़ी बघारते हों या कि कुछ और..लेकिन म … more →
डा० अमर कुमार wrote 1 year ago: एक अधीर फुसफुसाहट.., “ कौन है, अंदर ? “ फ़ौरन ही जवाब मिलता है, एक खीझभरी जम्हुँआई के साथ.., “ अरे या … more →
डा० अमर कुमार wrote 1 year ago: हम अपने गिरेबाँ में झाँक चुके, अब आपकी बारी है ! बहुधा एक अल्प पढ़ालिखा आदमी बल्कि कभी कभी अनपढ़ भी, क … more →
डा० अमर कुमार wrote 1 year ago: प्रिय मित्रों … more →
डा० अमर कुमार wrote 1 year ago: आपमें से लगभग हर कोई कम्प्यूटर का इतना जानकार है कि मायने आईने की तरह साफ़ है, कंट्रोल अल्टर डिलीट या … more →