ना जा उनके मुहलले मे उनकी गिलयाँ तंग हो गई है छोड के अपनी जमीं वो भी हमारे संग हो गई है इधर उधर नजरे ना जाने कया ढूढँती है तुमहे सामने पा के ये दंग हो गई है आसमान पे सतरंगी सपनो की घटाएँ छाई है लगता ह… more →
कुछ िदल सेkmuskan wrote 1 year ago: ना जा उनके मुहलले मे उनकी गिलयाँ तंग हो गई है छोड के अपनी जमीं वो भी हमारे संग हो गई है इधर उधर नजरे … more →