चर्चा करु तब चौहटे, ज्ञान करो तब दोय ध्यान करो तब एकिला, और न दूजा कोय संत श्री कबीरदास जी का कथन है जब ज्ञान चर्चा चौराहै पर करो पर जब उसका अध्ययन करना हो तो दो लोगों की बीच में ही ठीक है। ज्ञान के … more →
दीपक भारतदीप की ई-पत्रिकादीपक भारतदीप wrote 1 month ago: चर्चा करु तब चौहटे, ज्ञान करो तब दोय ध्यान करो तब एकिला, और न दूजा कोय संत श्री कबीरदास जी का कथन है … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: आया फंदेबाज और बोला ”क्या दीपक बापू हम तो समझते थे कोई भारी भरकम लेखक को पर हम अब समझे हमें भर … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: पकी कहती देखि के, गरब किया किसान अजहूँ झोला बहुत हैं, घर आवै तब जान संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते हैं … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: माया मया सब कहैं, माया लखै न कोय जो मन में ना उतरे, माया कहिए सोय संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते हैं क … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: जौन चाल संसार के जौ साधू को नाहिं डिंभ चाल करनी करे, साधू कहो मत ताहिं संत शिरोमणि कबीरदास जीं कहते … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: गुरु कुम्हार शीश कुंभ है, गढ़िं-गढ़िं काढेँ खोट अंतर हाथ सहार दे, बाहर बाहि चोट संत शिरोमणि कबीरदास ज … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: सीखै सुनै विचार ले, ताहि शब्द सुख देय बिना समझै शब्द गहै, कछु न लोहा लेय संत शिरोमणि कबीर दास जी … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: कबीर जब हम गावते, तब जाना गुरु नाहीं अब गुरु दिल में देखिया, गावन को कछु नाहिं संत शिरोमणि कबीरदास ज … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: आवत गारी एक है, उलटत होय अनेक कहैं कबीर नहिं उलटिए, वही एक की एक संत कबीर जी का कहना है की गाली आते … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: 1.जो नीच प्रवृति के लोग दूसरों के दिलों को चोट पहुचाने वाले मर्मभेदी वचन बोलते हैं, दूसरों की बुराई … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: बाहर क्या दिखराइये, अन्तर जानिए राम कहा काज संसार से, तुझे घनी से काम संत शिरोमणि कबीरदास कहते हैं … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: जौन चाल संसार के जौ साधू को नाहिं डिंभ चाल करनी करे, साधू कहो मत ताहिं संत शिरोमणि कबीरदास जीं कहते … more →