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Blogs about: कबीर

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संत कबीर के दोहे-कष्ट और कलह की जड़ है गाली देना (gali dena galat-kabir ke dohe

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: आवत गारी एक है, उलटत होय अनेक। कहैं कबीर नहिं उलटिये, वही एक की एक।संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते हैं क … more →

Tags: अध्यात्म, अनुभूति, अभिव्यक्ति, कला, मस्तराम, समाज, हिंदी पत्रिका, हिन्दी, Blogroll

कबीर के दोहे: ज्ञान चर्चा चौराहे पर और ध्यान एकांत में ही करो

दीपक भारतदीप wrote 10 months ago: अष्ट सिद्धि नव निधि लौं, सबही मोह की खान त्याग मोह की वासना, कहैं कबीर सुजान संत श्री कबीरदास का कथन … more →

Tags: hindi Personal, Hindi Education, Hindi friends, Hindi Poem, Hindi Darshan, Hindu darshan, India, hindu dharm, hindi mitra

श्वः कार्यमद्य...यानी काल करै सो आज... (महाभारत)

योगेन्द्र जोशी wrote 11 months ago: महाकाव्य महाभारत के शान्तिपर्व में पितामह भीष्म द्वारा युधिष्ठिर को विविध उपदेश दिये जाने का विस्तृत … more →

Tags: नीति, संस्कृत-साहित्य, सूक्ति, महाभारत, हिन्दी साहित्य, Morals, Mahabharata, भीष्म, युधिष्ठिर

प्रेमाश्रयी काव्य के कवि

संपादक- मिथिलेश वामनकर wrote 1 year ago: निर्गुण प्रेमाश्रयी शाखा के प्रमुख कवियों का परिचय मलिक मुहम्मद जायसी, कुतबन, मंझन, उसमान, शेख नवी, … more →

Tags: 2 भक्ति काल, mppsc mp psc, MP, निर्गुण प्रेमाश्रयी, जायसी, कुतुबन, मंझन, शेख नबी, उसमान

कबीर की साखी-2

संपादक- मिथिलेश वामनकर wrote 1 year ago: :: चितावणी :: कबीर नौबति आपनी, दिन दस लेहु बजाइ। ए पुर पद्दन ए गली, बहुरि न देखहु आइ।।९९।। कबीर कहते … more →

कबीर की साखी-1

संपादक- मिथिलेश वामनकर wrote 1 year ago: :: गुरुदेव :: *****************   सतगुरु सवाँ न को सगा, सोधी सईं न दाति । हरिजी सवाँ न को हितू, हरिज … more →

साखी में संत कबीर

संपादक- मिथिलेश वामनकर wrote 1 year ago: हिंदी साहित्य में कबीर का व्यक्तित्व अनुपम है। गोस्वामी तुलसीदास को छोड़ कर इतना महिमामण्डित व्यक्ति … more →

इस पत्रिका के पहले औपचारिक अंक का विमोचन1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: आज से यह पत्रिका प्रत्येक शनिवार को नियमित रूप से प्रकाशित होगी। इसका लेखन एवं संपादन एक स्वयंसेवी प … more →

Tags: hindi, inglish, आलेख, हास्य व्यंग्य, vyangya, web dunia, web bhaskar, web navabharat, अभिव्यक्ति

तेरा मेरा मनुवां

Rewa Smriti wrote 1 year ago: तेरा मेरा मनुवां कैसे एक होइ रे । मै कहता हौं आँखन देखी, तू कहता कागद की लेखी । मै कहता सुरझावन हारी … more →

मोको कहां2 comments

Rewa Smriti wrote 1 year ago: मोको कहां ढूढें तू बंदे मैं तो तेरे पास मे । ना मैं बकरी ना मैं भेडी ना मैं छुरी गंडास मे । नही खाल … more →

यह तो है हिंदी का अंतर्जाल युग -आलेख

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: हिंदी की विकास यात्रा का चार खंडों में बांटा जाता है और इसमें हमारे यहां सबसे अधिक भक्ति काल महत्वपू … more →

Tags: vews, inglish, vishwas, संपादकीय, अभिव्यक्ति, नज़रिया, सूचना, हास्य व्यंग्य, व्यंग्य

Latest and Greatest Ubuntu Linux Due in One More Month

oskanpur wrote 1 year ago: नवीनतम व आधुनिक लाइनक्स उबुँटू अप्रैल २००८ में आपके लिए पेश – मुफ्त में डाउनलोड करें व सबको ला … more →

Tags: नदी, रामचरितमानस, मानस, सँगम, ॠतु, ग्रीष्म, शरद, बारिश, समुद्र

क्यों कहे उल्टा

Amarjeet Singh wrote 1 year ago: बात को उल्टा क्यों कहा जाए? आम चलन तो यह है की बात हो सीधी और सरल, ताकि समझ मे आए और जो कहा जा रहा ह … more →

Tags: उलटवांसी, नवभारत टाइम्स, क्यों कहे उल्टा, उल्टा, समाज सुधारक, सीधी बात, चपत, संजय वर्मा

उडो न कागा कारे1 comment

Amarjeet Singh wrote 1 year ago: उडो न कागा कारे, उडो न कागा कारे, देह मिली जहे, अपने राम प्यारे, उडो न कागा कारे, उडो न कागा कारे, प … more →

Tags: Álbums, जगजीत सिहँ, Devotional, Jagjit Singh, Man Jeetai Jagjeet, जगजीत सिंह, Hmv, Devotional, राम

संत कबीर वाणी:बिना देह के कौतुक देखा

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: गुरु मिले शीतल भया, मिति मोह तन पाया निशि वासर सुख निधि लहूँ, अन्तर प्रगटे आप संत शिरोमणि कबीरदास जी … more →

Tags: Blogroll, Hindi Education, Hindi friends, Hindi writing, Hindi Darshan, Hindu culture, bharat, web duniya, hindi megzine

संत कबीर वाणी:कल्पित उपासना से कौन जीव बचेगा

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: राजा की चोरी करे, रहै रंग की ओट कहैं कबीर क्यों उबरै, काल कठिन की चोट संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते है … more →

Tags: Blogroll, hindi Personal, Hindu darshan, bharat, web duniya, hindi adhyatm, hindi sant, web dunia, Hindi Blogging

संत कबीर वाणी:शब्द रटने से कोई लाभ नहीं

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: ‘कबीर’ मन फूल्या फिरै,करता हूँ मैं प्रेम कोटि क्रम सिरि ते चल्या, चेत न देखै भ्रम संत शि … more →

Tags: bharat, web duniya, hindi adhyatm, Kabir, web dunia, web jagaran, web bhasakar, web nai duniya, Deepak bharatdeep

संत कबीर वाणी:पढ़ कर पत्थर और लिख कर ईंट होते लोग

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: चतुराई क्या कीजिए, जो नहिं शब्द समाय कोटिक गुन सूवा पढै, अन्त बिलाई खाय संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते … more →

Tags: aastha, aducation, arebic, आध्यात्म, आस्था, चिन्तन, दीपक भारतदीप, भाषा, शिक्षा

संत कबीर वाणी:ज्ञानी को अज्ञानी मिले तो बकवाद होती है 1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: ज्ञानी को ज्ञानी मिले, रस की लूटन लूट ज्ञानी ज्ञानी मिले, हीवे माया कूट यदि ज्ञानी को ज्ञानी पुरुष म … more →

Tags: Hindi friends, Hindi Darshan, hindi duniya, web duniya, hindi megzine, Kabir, hindi shabd, web dunia, web jagaran


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