आवत गारी एक है, उलटत होय अनेक। कहैं कबीर नहिं उलटिये, वही एक की एक।संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते हैं कि जब गाली आती है तो एक ही होती है पर उसका जवाब देने पर उसकी संख्या बढ़ती जाती है। अगर कोई मूर्ख आदमी … more →
दीपक भारतदीप की शब्दलेख-पत्रिकादीपक भारतदीप wrote 1 month ago: आवत गारी एक है, उलटत होय अनेक। कहैं कबीर नहिं उलटिये, वही एक की एक।संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते हैं क … more →
दीपक भारतदीप wrote 10 months ago: अष्ट सिद्धि नव निधि लौं, सबही मोह की खान त्याग मोह की वासना, कहैं कबीर सुजान संत श्री कबीरदास का कथन … more →
योगेन्द्र जोशी wrote 11 months ago: महाकाव्य महाभारत के शान्तिपर्व में पितामह भीष्म द्वारा युधिष्ठिर को विविध उपदेश दिये जाने का विस्तृत … more →
संपादक- मिथिलेश वामनकर wrote 1 year ago: निर्गुण प्रेमाश्रयी शाखा के प्रमुख कवियों का परिचय मलिक मुहम्मद जायसी, कुतबन, मंझन, उसमान, शेख नवी, … more →
संपादक- मिथिलेश वामनकर wrote 1 year ago: :: चितावणी :: कबीर नौबति आपनी, दिन दस लेहु बजाइ। ए पुर पद्दन ए गली, बहुरि न देखहु आइ।।९९।। कबीर कहते … more →
संपादक- मिथिलेश वामनकर wrote 1 year ago: :: गुरुदेव :: ***************** सतगुरु सवाँ न को सगा, सोधी सईं न दाति । हरिजी सवाँ न को हितू, हरिज … more →
संपादक- मिथिलेश वामनकर wrote 1 year ago: हिंदी साहित्य में कबीर का व्यक्तित्व अनुपम है। गोस्वामी तुलसीदास को छोड़ कर इतना महिमामण्डित व्यक्ति … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: आज से यह पत्रिका प्रत्येक शनिवार को नियमित रूप से प्रकाशित होगी। इसका लेखन एवं संपादन एक स्वयंसेवी प … more →
Rewa Smriti wrote 1 year ago: तेरा मेरा मनुवां कैसे एक होइ रे । मै कहता हौं आँखन देखी, तू कहता कागद की लेखी । मै कहता सुरझावन हारी … more →
Rewa Smriti wrote 1 year ago: मोको कहां ढूढें तू बंदे मैं तो तेरे पास मे । ना मैं बकरी ना मैं भेडी ना मैं छुरी गंडास मे । नही खाल … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: हिंदी की विकास यात्रा का चार खंडों में बांटा जाता है और इसमें हमारे यहां सबसे अधिक भक्ति काल महत्वपू … more →
oskanpur wrote 1 year ago: नवीनतम व आधुनिक लाइनक्स उबुँटू अप्रैल २००८ में आपके लिए पेश – मुफ्त में डाउनलोड करें व सबको ला … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: बात को उल्टा क्यों कहा जाए? आम चलन तो यह है की बात हो सीधी और सरल, ताकि समझ मे आए और जो कहा जा रहा ह … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: उडो न कागा कारे, उडो न कागा कारे, देह मिली जहे, अपने राम प्यारे, उडो न कागा कारे, उडो न कागा कारे, प … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: गुरु मिले शीतल भया, मिति मोह तन पाया निशि वासर सुख निधि लहूँ, अन्तर प्रगटे आप संत शिरोमणि कबीरदास जी … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: राजा की चोरी करे, रहै रंग की ओट कहैं कबीर क्यों उबरै, काल कठिन की चोट संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते है … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: ‘कबीर’ मन फूल्या फिरै,करता हूँ मैं प्रेम कोटि क्रम सिरि ते चल्या, चेत न देखै भ्रम संत शि … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: चतुराई क्या कीजिए, जो नहिं शब्द समाय कोटिक गुन सूवा पढै, अन्त बिलाई खाय संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: ज्ञानी को ज्ञानी मिले, रस की लूटन लूट ज्ञानी ज्ञानी मिले, हीवे माया कूट यदि ज्ञानी को ज्ञानी पुरुष म … more →