घर से दो दिन के लिए ही क्यों न जाओ डर ही रहता है कब कौन कब्ज़ा करले! समय ही ऐसा है। सब को अपनी-अपनी पड़ी है। सब बस अपने बारे में सोचते हैं। चाहे किसी को परेशानी क्यों न हो हम तो बस अपनी परवाह करेंगे। छज… more →
पसंदप्रेमलता पांडे wrote 9 months ago: घर से दो दिन के लिए ही क्यों न जाओ डर ही रहता है कब कौन कब्ज़ा करले! समय ही ऐसा है। सब को अपनी-अपनी प … more →
प्रेमलता पांडे wrote 3 years ago: मेरे घर एक कबूतर और उसकी रानी हैं, बिन कहे वो कहते एक कहानी हैं। दोनों पक्के साथी हैं जैसे दीया और ब … more →