Blogs about: कम्युनिस्ट

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कम्युनिस्ट और मजदूर वर्ग की पार्टियाँ

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 4 days ago: घोषणापत्र का यह वाक्य कि “कम्युनिस्ट मजदूर वर्ग की पार्टियों के बदले में अपनी कोई अलग पार्टी न … more →

Tags: विरासत, सर्वहारा, कम्युनिस्ट पार्टी क, कार्ल मार्क्स, डेविड रियाज़ानोव, मजदूर वर्ग की विरासत, व्याख्यात्मक टिप्पण

सर्वहारा आन्दोलन के अंतरराष्ट्रीय चरित्र का विकास और क्रांति 1 comment

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 1 week ago: 30.  ‘कम्युनिस्ट मेनिफेस्टो’ पर डेविड रियाजानोव की व्याख्यात्मक टिप्पणियां “वर्ग विरोध पर आधा … more →

Tags: उत्पादक शक्तियां, उत्पादन के संबंध, क्रांति, पूंजीवादी संकट, युद्ध, संघर्ष, सर्वहारा, इन्कलाब, कम्युनिस्ट पार्टी क

प्रो.एल.पी.जी. बुद्धिजीवी बनाम वामपंथी बुद्धिजीवी 2 comments

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 1 week ago: पिछली शताब्दी के नब्बे के दशक में और उसके बाद भारत में एक ऐसा वर्ग पनपा है जिसे प्रो.एल.पी.जी. वर्ग … more →

Tags: विचारणीय, सर्वहारा, Maoism, अधिशेष, बीस फीसदी का लोकतन्त, मजदूरों का जीवन, माओ त्से तुंग, वामपंथी

फासीवाद के 14 लक्षण 4 comments

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 2 weeks ago: डा. लॉरेंस ब्रिट डा. लॉरेंस ब्रिट  – एक राजनीतिक विज्ञानी जिन्होंने फासीवादी शासनों जैसे हिटल … more →

Tags: आतंकवाद, काले कानून, फासिज्म, साम्प्रदायिकता, अन्धराष्ट्रवाद, आधी आबादी, ट्रेड यूनियन, राष्ट्रवाद, वर्ग चेतना

मैं कार्ल मार्क्स के अतिरिक्त मूल्य के सिद्धांत की इतनी सरल प्रस्तुति सुन रही थी...2 comments

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 3 weeks ago: जैक लंडन का उपन्यास - देखें : \’आयरन हील\’ और अतिरिक्त मूल्य का नियम सपने का गणित अर् … more →

Tags: उत्पादक शक्तियां, उत्पादन के संबंध, पूंजीवादी संकट, मार्क्सवाद, समाजवाद, सर्वहारा, अधिशेष, कार्ल मार्क्स, पुस्तकों सबंधी जानक

आज के किसान का चरित्र - हमारी पहुँच - कुछ और स्पष्टता

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 3 weeks ago: “कांग्रेस की जीत पर अफलातून और सुरेश चिपलूनकर के दुःख में हम भी शरीक होते मगर … की टिप्पणियों के प्र … more →

Tags: आंदोलन, क्रांति, समाजवाद, सर्वहारा, Communist, इन्कलाब, किसान, क्रांतिकारी, जनवादी

नए सांस्कृतिक कार्यभारों की ज़मीन--- महत्तव्पूर्ण सामजिक-आर्थिक सरंचनागत परिवर्तनों और विश्व-ऐतिहासिक विपर्यय का यह दौर

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 3 weeks ago: एक नए सर्वहारा पुनर्जागरण और प्रबोधन के वैचारिक सांस्कृतिक कार्यभार (सांस्कृतिक मोर्चे पर नई शुरुआत … more →

Tags: लेनिन, क्रांति, आंदोलन, समाजवाद, सर्वहारा, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, पूंजीवादी संकट, मार्क्सवाद

कांग्रेस की जीत…अफलातून और सुरेश चिपलूनकर… कुछ विशेष टिप्पणियों का सामान्य जवाब2 comments

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 4 weeks ago: कड़ी जोड़ने के लिए देखे : “कांग्रेस की जीत पर अफलातून और सुरेश चिपलूनकर के दुःख में हम भी शरीक होते … more →

Tags: आह्वान, उदारीकरण, दायित्वबोध, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, पूंजीवादी संकट, प्रतिबद्ध, मार्क्सवाद, लेनिन

"कांग्रेस की जीत पर अफलातून और सुरेश चिपलूनकर के दुःख में हम भी शरीक होते मगर …की टिप्पणियों के प्रत्युत्तर में5 comments

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 1 month ago: इस पोस्ट से सम्बंधित प्राप्त टिप्पणियों के पश्चात् यह ज़रूरी हो गया है कि इस विषय पर वाद-विवाद जारी … more →

Tags: आंदोलन, आह्वान, दायित्वबोध, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, प्रतिबद्ध, लेनिन, विरासत, सर्वहारा

स्वतंत्रता सेनानी और गदर पार्टी के आखिरी चिराग बाबा भगत सिंह बिलगा के निधन पर

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 1 month ago: बाबा भगत सिंह बिलगा अपने 102वें वर्ष में स्वतंत्रता सेनानी और गदर पार्टी के आखिरी चिराग बाबा भगत सि … more →

Tags: नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, प्रतिबद्ध, भगत सिंह, विरासत, सर्वहारा, कम्युनिज्म, गदर पार्टी, भगत सिंह बिलगा

मुझसे पहली सी मुहब्ब्त. . अंतिम भाग

Girijesh Rao wrote 1 month ago: नज्म बहुत सरल सी दिखती है, प्रेमी प्रेमिका से कह रहा है कि तुम अभी भी सुन्दर हो लेकिन जमाने में इतने … more →

Tags: कविता, दुख, द्वैत, फ़ैज़ अहमद फ़ैज़, बौद्ध, विशिष्टाद्वैत, समाजवाद, सूफी

कांग्रेस की जीत पर अफलातून और सुरेश चिपलूनकर के दुःख में हम भी शरीक होते मगर ... 14 comments

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 1 month ago: जिस देश का प्रधानमंत्री स्वयं स्वीकार करे की देश की 7० प्रतिशत जनता 20 या 20 रूपए से कम पर गुज़ारा कर … more →

Tags: भगत सिंह, लेनिन, आह्वान, सर्वहारा, मार्क्सवाद, फासिज्म, आतंकवाद, काले कानून, इन्कलाब

मई दिवस का इतिहास-2

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 1 month ago: इस पोस्ट का पहला भाग ….यहाँ देखें शिकागो की हड़ताल और हे मार्केट की घटना पहली मई को शिकागो में … more →

Tags: आंदोलन, उत्पादक शक्तियां, उत्पादन के संबंध, एंगेल्स, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, फासिज्म, युद्ध, लेनिन

मई दिवस का इतिहास

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 1 month ago: अलेक्जेण्डर ट्रैक्टनबर्ग अनुवाद : अभिनव सिन्हा मई दिवस का जन्म काम के घण्टे कम करने के आन्दोलन से … more →

Tags: आंदोलन, उत्पादक शक्तियां, उत्पादन के संबंध, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, युद्ध, विरासत, संघर्ष, सर्वहारा

मई 1886 का वह रक्तरंजित दिन1 comment

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 1 month ago: मई 1886 का वह रक्तरंजित दिन जब मज़दूरों के बहते ख़ून से जन्मा लाल झण्डा मज़दूरों का त्योहार मई दिवस आठ … more →

Tags: आह्वान, बिगुल, मजदूर, शोषण-उत्पीड़न, श्रमशक्ति, संघर्ष, सर्वहारा, पूँजीपति वर्ग के वफा, मई दिवस

मई दिवस पर याद किया मज़दूरों की शहादत को

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 1 month ago: बिगुल संवाददाता गोरखपुर नौजवान भारत सभा, बिगुल मज़दूर दस्ता और अखिल भारत नेपाली एकता मंच ने मिलकर अन् … more →

Tags: आंदोलन, आह्वान, क्रांति, मजदूर, सर्वहारा, इन्कलाब, मई दिवस, मजदूरों के हक़

कार्ल मार्क्‍स के जन्मदिन (5 मई) के अवसर पर 1 comment

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 1 month ago: कार्ल मार्क्‍स फ्रेडरिक एंगेल्स विज्ञान के इतिहास में मार्क्‍स ने जिन महत्त्वपूर्ण बातों का पता लग … more →

Tags: बिगुल, क्रांति, समाजवाद, सर्वहारा, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, पूंजीवादी संकट, मार्क्सवाद, विरासत

चुनावी नौटंकी का पटाक्षेप: अब सत्ता की कुत्ताघसीटी शुरू

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 1 month ago: जनता को सिर्फ यह तय करना है कि वह इसे कितना और बर्दाश्त करेगी! बिगुल डेस्क करीब डेढ़ महीने तक चली द … more →

Tags: आह्वान, क्रांति, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, बिगुल, मजदूर, मध्यवर्ग का ऊपरी तबक, शोषण-उत्पीड़न, चुनाव

पूंजीवाद के खिलाफ मेहनतकश वर्ग के प्रतिरोध के विभिन्न रूप

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 1 month ago: 23.  ‘कम्युनिस्ट मेनिफेस्टो’ पर डेविड रियाजानोव की व्याख्यात्मक टिप्पणियां पूंजीवादी समाज मेहनतकशों … more →

Tags: पुस्तकें, सर्वहारा, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, मार्क्सवाद, विरासत, उत्पादक शक्तियां, उत्पादन के संबंध, एंगेल्स


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