सब्र हम यूँ इख़्तियार करते हैं होता नहीं है बेक़ार करते हैं हमको मालूम है वो है बेवफ़ा फिर भी हम ऐतबार करते हैं जिसको अपनी ही कोई ख़बर नहीं उसी का हम इंतज़ार करते हैं कभी टिकते ही नहीं हैं ये जज़्बे ज़िंदगी … more →
इक शायर अंजाना सा...Rohit Jain wrote 1 year ago: सब्र हम यूँ इख़्तियार करते हैं होता नहीं है बेक़ार करते हैं हमको मालूम है वो है बेवफ़ा फिर भी हम ऐतबार … more →