दीप मन के जलाओ करो नवसृजन, दूर तम को भगाओ करो नवसृजन। भाव उगते नहीं, शब्द मिलते नहीं, मन का सागर खंगालो करो नवसृजन। कण-कण यहाँ सहमा-सहमा लगे, स… more →
अनुभूति कलशramadwivedi wrote 1 year ago: दीप मन के जलाओ करो नवसृजन, दूर तम को भगाओ करो नवसृजन। भाव उगते नहीं, श … more →