‘कहाँ गायब थे मंगरू?’-किसी ने चुपके से पूछा। वे बोले- यार, गुमनामियाँ जाहिल मिनिस्टर था। बताया काम अपने महकमे का तानकर सीना- कि मक्खी हाँकता था सबके छोए के कनस्टर का। सदा रखते हैं करके नोट… more →
कारवाँ गुज़र गया, गुबार देखते रहे!Rewa Smriti wrote 1 year ago: ‘कहाँ गायब थे मंगरू?’-किसी ने चुपके से पूछा। वे बोले- यार, गुमनामियाँ जाहिल मिनिस्टर था। … more →
Rewa Smriti wrote 1 year ago: रात आधी खींच कर मेरी हथेली एक उंगली से लिखा था प्यार तुमने। फ़ासला था कुछ हमारे बिस्तरों में और चारो … more →
Rewa Smriti wrote 1 year ago: मैं कब कहता हूं जग मेरी दुर्धर गति के अनुकूल बने, मैं कब कहता हूं जीवन-मरू नंदन-कानन का फूल बने ? का … more →
Rewa Smriti wrote 1 year ago: इस पार, प्रिये मधु है तुम हो, उस पार न जाने क्या होगा! यह चाँद उदित होकर नभ में कुछ ताप मिटाता जीवन … more →
Rewa Smriti wrote 1 year ago: सन्नाटा वसुधा पर छाया, नभ में हमनें कान लगाया, फ़िर भी अगणित कंठो का यह राग नहीं हम सुन पाते हैं कहत … more →
Rewa Smriti wrote 1 year ago: मानव पर जगती का शासन, जगती पर संसृति का बंधन, संसृति को भी और किसी के प्रतिबंधो में रहना होगा! साथी, … more →
Rewa Smriti wrote 1 year ago: संस्रिति के विस्त्रित सागर मे सपनो कि नौका के अंदर दुख सुख कि लहरों मे उठ गिर बहता जाता, मैं सो जाता … more →
Rewa Smriti wrote 1 year ago: जब भी यह दिल उदास होता है जाने कौन आस-पास होता है होंठ चुपचाप बोलते हों जब सांस कुछ तेज़-तेज़ चलती ह … more →
Rewa Smriti wrote 1 year ago: कहां रहेगी चिड़िया ? आंधी आई जोर शोर से डाली टूटी है झकोर से उड़ा घोंसला बेचारी का किससे अपनी बात कह … more →
Rewa Smriti wrote 1 year ago: लब पे आती है दुआ बनके तमन्ना मेरी ज़िन्दगी शम्मा की सुरत हो ख़ुदाया मेरी दूर दुनिया का मेरे दम अँधेर … more →
Rewa Smriti wrote 1 year ago: यूँ तेरी रहगुज़र से दिवानावर गुज़रे काँधे पे अपने रख़ के अपना मजा़र गुज़रे बैठे रहे हैं रास्ता में द … more →
Rewa Smriti wrote 1 year ago: यह न सोचो कल क्या हो कौन कहे इस पल क्या हो रोओ मत, न रोने दो ऐसी भी जल-थल क्या हो बहती नदी की बांधे … more →
Rewa Smriti wrote 1 year ago: सर फ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है देखना है ज़ोर कितना बाज़ू-ए-क़ातिल में है। करता नहीं क्यूं द … more →
Rewa Smriti wrote 1 year ago: गिरिराज हिमालय से भारत का कुछ ऐसा ही नाता है। (1). इतनी ऊँची इसकी चोटी कि सकल धरती का ताज यही। पर्वत … more →
Rewa Smriti wrote 1 year ago: लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती, कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती। नन्हीं चींटी जब दाना लेकर … more →
Rewa Smriti wrote 1 year ago: क्या करूं संवेदना लेकर तुम्हारी? क्या करूं? मैं दुखी जब-जब हुआ संवेदना तुमने दिखाई, मैं कृतज्ञ हुआ ह … more →
Rewa Smriti wrote 1 year ago: अग्नि पथ! अग्नि पथ! अग्नि पथ! वृक्ष हों भले खड़े, हो घने, हो बड़े, एक पत्र-छॉंह भी मॉंग मत, मॉंग मत, … more →
Rewa Smriti wrote 1 year ago: तुम मुझमें प्रिय! फिर परिचय क्या! तारक में छवि प्राणों में स्मृति पलकों मे नीरव पद की गति लघु उर पुल … more →
Rewa Smriti wrote 1 year ago: चिर सजग आँखें उनींदी आज कैसा व्यस्त बाना! जाग तुझको दूर जाना! अचल हिमगिरि के हृदय में आज चाहे कंप … more →