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Blogs about: कला

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बन जायेगा तमाशा-हिंदी शायरी (ban jayega tamasha-hindi shayri)

दीपक भारतदीप wrote 49 minutes ago:  अपने दर्द का बयां न कभी न करना बन जायेगा तमाशा। अपनी ही गमों ने लोग हैरान हैं अपनों की करतूतों … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, मस्तराम, व्यंग्य, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, हिन्दी शायरी, हिन्दी शेर, Blogging

जलवायु परिवर्तन पर गंभीर नहीं हैं अमीर देश-हिंदी लेख

दीपक भारतदीप wrote 54 minutes ago: कोपेनहेगन में जलवायु परिवर्तन को लेकर जोरदार सम्मेलन हो रहा है। इसमें गैस उत्सर्जन को लेकर अनेक तरह … more →

Tags: arebic, अभिव्यक्ति, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, संपादकीय, सूचना, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका

जातिवाद ख़त्म होना संभव नहीं-हिंदी लेख

दीपक भारतदीप wrote 15 hours ago: क्या देश में समाज से कभी जाति समाप्त हो सकती है? अनेक लोग दिन रात यह संदेश गाते फिरते हैं कि यहां जा … more →

Tags: arebic, अनुभूति, अभिव्यक्ति, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, समाज, साहित्य, हिन्दी

हिन्दू धर्म सन्देश-बड़े लोगों का मुख ताकने वालों को धिक्कार (hindu dharam sandesh-bade logon ko mukh n tako)

दीपक भारतदीप wrote 16 hours ago: मृतिपण्डो जलरेखया वलचितः सर्वोऽप्ययं न नन्वणुः स्वांशीकृत्य स एवं संगरशतै राज्ञां गणैर्भुज्यते। ते द … more →

Tags: हिन्दी, चिंतन, अध्यात्म, alekh, editoriyal, Internet, bharat, India, अनुभूति

चाणक्य नीति शास्त्र-नयेपन का अहसास करें (chankya niti-nayepan ka ahsas

दीपक भारतदीप wrote 16 hours ago: गते शोको न कत्र्तव्यो भविष्यं नैव चिनतयेत्। वर्तमानेन कालेन प्रवर्तन्ते विचक्षणाः।। हिंदी में भावार् … more →

Tags: अध्यात्म, अनुभूति, अभिव्यक्ति, आध्यात्म, आलेख, मनोरंजन, मस्तराम, हिंदी पत्रिका, हिन्दी

आम इंसान की जिंदगी-हिन्दी शायरी (life of comman man-hindi poem)

दीपक भारतदीप wrote 6 days ago:  जो तुम भी चाहोगे इंसानी बुत बनकर बड़े कहलाओगे। सीख लो नटों के इशारों की डोर पर नाचना जमाने में … more →

Tags: arebic, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, शायरी, साहित्य, हिन्दी, मनोरंजन, मस्ती, व्यंग कविता

हिन्दू अध्यात्मिक संदेश-विद्वान विपत्तियों का पहले अनुमान कर लेते है (hindi dharm sandesh-vidavan aur vipatti)2 comments

दीपक भारतदीप wrote 6 days ago: अशिक्षितनयः सिंहो हन्तीम केवलं बलात्। तच्च धीरो नरस्तेषां शतानि जतिमांजयेत्।। हिंदी में भावार्थ-सिंह … more →

Tags: अध्यात्म, अनुभूति, अभिव्यक्ति, आलेख, मस्तराम, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, E-patrika, Friends

हिन्दू अध्यात्मिक संदेश-धीरज न रखने से पतन होता है (dhiraj aur jivan-hindu adhyatmik sandesh)

दीपक भारतदीप wrote 6 days ago: कुमिकीटवधोहत्या मद्यानुगतभोजनम्। फलेन्धनकुसुमस्तयमधैर्य च मलावहम्।। हिंदी में भावार्थ-कोई भी मनुष्य … more →

Tags: अभिव्यक्ति, आध्यात्म, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, मातृभाषा, समाज सेवा, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका

हिन्दू अध्यात्मिक संदेश-मांसाहारी से मित्रता भी भक्ति का नाश करती है (hindu ahdyatmik sandesh-meat and religion)

दीपक भारतदीप wrote 6 days ago: मासांहारी मानवा, परतछ राछस जान। ताकी संगति मति करै, होय भक्ति में हान।। संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते … more →

Tags: अध्यात्म, अभिव्यक्ति, कबीर, मनोरंजन, मस्तराम, हिंदी पत्रिका, हिन्दी, adhyatm, आध्यात्म

धर्म और कमाई-हास्य साहित्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 1 week ago:   धर्म बन गयी है शय बेचा जाता है इसे बाज़ार में, सबसे बड़े सौदागर पीर कहलाते हैं. भूख, गरीबी, बे … more →

Tags: अभिव्यक्ति, ताल-बेताल, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, व्यंग्य कविता, समाज, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका

पर्दे के पीछे-हिन्दी साहित्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 1 week ago: सच कहते हैं जिंदगी के फैसले कभी जंग से नहीं होते। पर्दे के पीछे तय हो जाते फैसले ले देकर कटवाते है व … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, मस्तराम, व्यंग्य, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, हिन्दी शायरी, हिन्दी शेर, Deepak bapu

किस जमाने की माशुका हो-हिन्दी हास्य कविता (hindi poem on love)

दीपक भारतदीप wrote 1 week ago:  माशुका ने पूछा आशिक से ‘अगर शादी के बाद मैं मर गयी तो क्या मेरी याद में ताजमहल बनवाओगे।’ आशिक … more →

Tags: abhivyakti, aducation, अनुभूति, अभिव्यक्ति, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, व्यंग्य चिंतन, साहित्य

हिन्दी लेखन में अध्यात्मिकता का पुट होना आवश्यक-हिन्दी चिन्तन1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 week ago: हिंदी भाषा की चर्चा अक्सर विवादों के कारण अधिक होती है। विवाद यही कि हिंदी थोपी जा रही है या हिंदी व … more →

Tags: abhivyakti, arebic, अनुभूति, अभिव्यक्ति, आध्यात्म, आलेख, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, भय का शासन

हिन्दू धर्म संदेश-सदगुणों से ही आयु बढ़ती है (sadgun aur ayu-hindu dharm sandesh)

दीपक भारतदीप wrote 1 week ago: अपनीतं सुनीतेन योऽयं प्रत्यानिनीषते। मतिमास्थाय सुदृढां तदकापुरुषव्रतम्।। हिंदी में भावार्थ-जो अन्या … more →

Tags: हिन्दी, आलेख, अध्यात्म, अभिव्यक्ति, Internet, hindu, bharat, India, सन्देश

संत कबीर संदेश-भगवान से रूखी रोटी ही मांगता हूं (roti-hindu dharm sandesh)

दीपक भारतदीप wrote 1 week ago: कबीर सांई मुझ को, रूखी रोटी देय। चुपड़ी मांगत मैं डरूं, मत रूखी छिन लेय।। संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते … more →

Tags: अध्यात्म, अनुभूति, अभिव्यक्ति, आलेख, मस्तराम, हिंदी पत्रिका, हिन्दी, bharat, Blogroll

संत कबीर दास संदेश-जीभ के स्वाद में ही विष है

दीपक भारतदीप wrote 2 weeks ago: जीभ स्वाद के कूप में, जहां हलाहल काम। अंग अविद्या ऊपजै, जाय हिये ते नाम। भावार्थ-संत शिरोमणि कबीरदास … more →

Tags: अनुभूति, आध्यात्म, आलेख, हिंदी पत्रिका, Blogroll, Deepak bharatdeep, hindi bharat, धर्म, संदेश

पहचान के लिए परेशान पूरा ज़माना-हिन्दी चिंतन और कविता (trouble of identity-hindi article and poem)

दीपक भारतदीप wrote 2 weeks ago: प्राकृतिक का नियम है परिवर्तन! दिन हुआ है तो रात भी होगी। सूरज उगा है तो जरूर डूबेगा। धूप है तो अंधे … more →

Tags: arebic, अनुभूति, अभिव्यक्ति, आध्यात्म, आलेख, आस्था, चिन्तन, दीपक भारतदीप, दीपकबापू

आदमी और अहसास-हिन्दी चिंतन और कविता (admi aur ahsas-hindi lekh aur kaivta)

दीपक भारतदीप wrote 2 weeks ago: आदमी अपनी जिंदगी को अपने नज़रिये से जीना चाहता है पर जिंदगी का अपना फलासफा है। आदमी अपनी सोच के अनुसा … more →

Tags: arebic, अभिव्यक्ति, कविता, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, व्यंग्य कविता, संपादकीय, हिन्दी

समाचार हिन्दी में-व्यंग्य कविता (news in hindi-satire poem)

दीपक भारतदीप wrote 2 weeks ago: समाचार भी अब फिल्म की तरह टीवी पर चलते हैं। हास्य पैदा करने वाले विज्ञापनों के बीच दृश्यों में हिंसा … more →

Tags: अभिव्यक्ति, मस्तराम, व्यंग्य, शायरी, शेर, समाज, साहित्य, हिन्दी पत्रिका, हिन्दी शायरी


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