ना लाओ ज़माने को तेरे-मेरे बीच दिल का रिश्ता है तेरे-मेरे बीच तंगिए-दिल से पहलू को छुटाओ गरज़ को न लाओ तेरे-मेरे बीच लख़्ते-दिल आँखों से रिसते हैं ये फ़ासला क्यों है तेरे-मेरे बीच किसी ग़ैर के कहे पे मत ज… more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 2 years ago: ना लाओ ज़माने को तेरे-मेरे बीच दिल का रिश्ता है तेरे-मेरे बीच तंगिए-दिल से पहलू को छुटाओ गरज़ को न लाओ … more →