कल फिर कुछ पहलू अनछुए से रह गये कल फिर कुछ वादे अनकहे से रह गये शायद मै जानता था कि ये आखिरी मुलाकात है तभी कई अरमान दिल में दबे रह गये ………………………… more →
Shubhashish Pandey wrote 1 year ago: कल फिर कुछ पहलू अनछुए से रह गये कल फिर कुछ वादे अनकहे से रह गये शायद मै जानता था कि ये आखिरी मुलाकात … more →
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