समर ऑफ़ सिक्स्टी नाइन क्या है? यह आंग्लभाषा का एक महाप्रसिद्ध गीत है। (इसका अर्थ होता है ” ६९ की गर्मी” जिसका तात्पर्य है सन १९६९ की गर्मी के दिन) वैसे ये रूपांतर आपको तब अच्छी तरह समझ आएगा… more →
तिरछी नजरियाNidhi KM wrote 1 week ago: एक कमरा सपनो भरा, फर्श मखमली, छत सितारों भरीं, दीवारें रंगों सजीं, खिड़कियाँ फूलों रंगीं, सपने कहीं … more →
Nidhi KM wrote 3 weeks ago: कदमों से कदमों को, मिलाने की बहुत कोशिश की, कभी मैं आगे बढ़ गयी, कभी तुम पीछे रह गये, बातों को बातों … more →
Nidhi KM wrote 1 month ago: सड़क के गढ्ढों मे, डोलता हुआ, आटो चला जा रहा था, एक स्टॉप मे, नवयुवती के चढ़ते ही, सारी नज़रे उस पर … more →
Nidhi KM wrote 3 months ago: 1) पहले :- बिन दस्तक, बिन आहट के, तुम मेरे दिल तक आए, कुछ यूँ समाए की, दूजी, सारी दस्तकें, सारी आहटे … more →
Nidhi KM wrote 4 months ago: मैं नदी थी प्यासी सी तुम सागर से मिलने चली थी मिलकर सागर मे ये जाना मैं ही अकेली, प्यासी नही थी सागर … more →
Nidhi KM wrote 2 months ago: तुम बहुत मीठा बोलते हो, हर शब्द को, चाशनी मे घोलते हो, मिशरी की तरह, रस घोलते हो, न कड़वा बोलते हो, … more →
Nidhi KM wrote 3 months ago: मैने कयी बार, कभी अपनों के, कभी तुम्हारे कहने पर, नयी सुबह का इंतज़ार किया, नयी माला मे फूल गुथे, नय … more →
Nidhi KM wrote 3 months ago: चलते थे जिस ज़मीं पर, संभल संभल कर हम, सरकी वही ज़मी नये कदम उठाने के पहले, आसमान से तो पानी बरसता … more →
Nidhi KM wrote 4 months ago: चाहे जले हमारा जहाँ, रौशन रहे उनका जहाँ, जहाँ रहे चाहत हमारी… न आए उन पर, कोई भी आँच, जहां की … more →
Nidhi KM wrote 4 months ago: जिसको जो कहना हो, उसको वो कहने देना, मेरी प्रीत को, प्रीत “निधि” की रहने देना, तुम कोई न … more →
Nidhi KM wrote 4 months ago: बारीशों मे भीगे जो, बादल से बरसे जो, कारण से धड़के जो, यादों मे रोए जो, वो मेरा दिल नही होगा… … more →
Nidhi KM wrote 4 months ago: छोटे छोटे सपने थे, पास मेरे सब अपने थे, न थी चाह, आसमान मे उड़ाने की, धरती ही मेरी अपनी थी, बड़ा सोच … more →
Nidhi KM wrote 4 months ago: तेरी ज़िंदगीं में कभी, धूप की तपन न हो, हो ज़रा भी आशंका, मेरा आंचल, तेरे सर पर हो, तेरी राहों मे क … more →
Nidhi KM wrote 5 months ago: 1) “वो”, मुझसे, बेइंतहाँ प्यार करता था, ऐसा वो और लोग मुझसे कहा करते थे, मेरे कारण उसके … more →
Nidhi KM wrote 5 months ago: कुतर दिए है, पंख अपने, जिनसे उँची उड़ान भारी थी, नील गगन मे, स्वच्छन्द उड़ चली थी, तोड़ दिए है, सब स … more →
Nidhi KM wrote 5 months ago: रिश्ता चुना था मैने, एक तेरा ही, इस दुनिया मे, अब उससे भी दूर होने का इरादा, तुमने जो जाता दिया, अच् … more →