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Blogs about: कविताएं

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दीपावली फिर टल गई13 comments

रवि कुमार, रावतभाटा wrote 1 month ago: दीपावली फिर टल गई (a poem by ravi kumar, rawatbhata) आफ़ताब का दम भरने वाले दिए की लौ से खौफ़ खा गए आ … more →

Tags: आफ़ताब, दिया, दीपक, दीपावली, रौशनी

समन्दर कभी ख़ामोश नहीं होता19 comments

रवि कुमार, रावतभाटा wrote 2 months ago: हरीश भादानी जी नहीं रहे. कल २ अक्टूबर को उनका निधन हुआ. जो उन्हें जानते हैं, वे सब जानते ही हैं. वे … more →

Tags: समन्दर, हरीश भादा्नी

ज़िंदगी का मुक़द्दस नग़्मा17 comments

रवि कुमार, रावतभाटा wrote 2 months ago: ज़िंदगी का मुक़द्दस नग़्मा (a poem by ravi kumar, rawatbhata) मैं आऊंगा जब चाक हो जाएगी हर राह कि जब ह … more →

Tags: छाय़ाचित्र

आसमान फिर सिमट रहा है17 comments

रवि कुमार, रावतभाटा wrote 2 months ago: आसमान फिर सिमट रहा है (a poem by ravi kumar, rawatbhata) आसमान जब भी उतरता है धरा पर उसके पास होते ह … more →

Tags: आसमान, क्षितिज, धरा, मिलन

फिर से लौटेंगे भेड़िए - रवि कुमार28 comments

रवि कुमार, रावतभाटा wrote 2 months ago: फिर से लौटेंगे भेड़िए – रवि कुमार ( a kavita poster by ravi kumar, rawatbhata) एक कविता पोस्टर … more →

Tags: कविता-पोस्टर, अंधेरा, भेडिये, रवि कुमार, Ravi kumar, ravikumarswarnkar

अहम नाक़ाबिलियतों के बाबजू्द19 comments

रवि कुमार, रावतभाटा wrote 3 months ago: अहम नाक़ाबिलियतों के बाबजू्द (a poem by ravi kumar, rawatbhata) जो अपना ज़मीर नहीं मार सकते वे इस मौजू … more →

Tags: नाक़ाबिलियत, मुर्दा, रवि कुमार, राज़, वज़ूद, ज़मीर

चाहे मुझे पागल करार दिया जाए27 comments

रवि कुमार, रावतभाटा wrote 3 months ago: चाहे मुझे पागल करार दिया जाए (a poem by ravi kumar, rawatbhata) कोई यदि पूछेगा सबसे बेहतर रंग कौनसा … more →

Tags: रोटी, मिट्टी, पसीना, आग, आवाज़, पागल

जिन्हें नज़ाकत से जिया है मैंने17 comments

रवि कुमार, रावतभाटा wrote 4 months ago: जिन्हें नज़ाकत से जिया है मैंने (a poem by ravi kumar, rawatbhata) मैंने जिद्दोजिहद की हर पल से और हा … more →

Tags: नदी, नज़ाकत, मुन्तकिल

मैं समन्दर के बिना कामिल नहीं14 comments

रवि कुमार, रावतभाटा wrote 4 months ago: मैं समन्दर के बिना कामिल नहीं (a poem by ravi kumar, rawatbhata) मेरी बुलन्दियों से हमेशा मुख़ालिफ़त र … more →

Tags: समन्दर, वज़ूद, बुलन्दी, गहराई

शोला हो चुकी निगाहों के जरिए9 comments

रवि कुमार, रावतभाटा wrote 5 months ago: शोला हो चुकी निगाहों के जरिए (a poem by ravi kumar, rawatbhata) मैं नींद खोजता रहा नींद एक ख़्वाब बिल … more →

Tags: ख़्वाब, शोला, निगाह, फ़लक

और शायद मैं फौरी नतीज़ों से खौफ़ज़दा हूं12 comments

रवि कुमार, रावतभाटा wrote 5 months ago: मेरे पास कई ख़्वाब हैं (a poem by ravi kumar, rawatbhata) मेरे पास कई ख़्वाब हैं ख़्वाबों के पास कई ताब … more →

Tags: ख़्वाब, ताबी्र

हमारे पास और शामें नहीं12 comments

रवि कुमार, रावतभाटा wrote 5 months ago: हमारे पास और शामें नहीं (a poem by ravi kumar, rawatbhata) मैंने उससे कहा मुझे तुमसे कुछ कहना है उसन … more →

Tags: बोसा, शाम

पक चुकी आँखों की ताबिश12 comments

रवि कुमार, रावतभाटा wrote 6 months ago: पक चुकी आँखों की ताबिश (a poem by ravi kumar, rawatbhata) ००००० जब कलम से रिसता लहू जमने लगा हो सफ़हा … more →

Tags: ताबिश, कलम, सफ़हात, कविता, चांद

मैं हर शै पर छाता गया7 comments

रवि कुमार, रावतभाटा wrote 6 months ago: मैं हर शै पर छाता गया (a poem by ravi kumar, rawatbhata) जब मैं सुलगा सुनहरी रेत में छिपी सुर्ख़ चिंग … more →

Tags: डायनासौर, आतिशफ़सान, आफ़्ताब

सूरज को डूबते देखना कोई सुंदर दृश्य नहीं हो सकता11 comments

रवि कुमार, रावतभाटा wrote 6 months ago: अच्छा लगता है (a poem by ravi kumar, rawatbhata) अच्छा लगता है बच्चों को खिलखिलाते देखना समन्दर को क … more →

Tags: सूरज, ज़िंदगी, दरख़्त

भूख एक बेबाक बयान है16 comments

रवि कुमार, रावतभाटा wrote 6 months ago: भूख एक बेबाक बयान है (a poem by ravi kumar, rawatbhata) भूख के बारे में शब्दों की जुगाली साफ़बयानी नह … more →

Tags: भूख, बयान

हमारी आंखें लुप्त हो रही हैं10 comments

रवि कुमार, रावतभाटा wrote 7 months ago: हमारी आंखें लुप्त हो रही हैं (a poem by ravi kumar, rawatbhata) हम एक अंधेरी खान में जी रहे हैं हम क … more →

Tags: आंखें, अंधेरा, खान

मैं ख़ुदाओं के बीच सो रहा12 comments

रवि कुमार, रावतभाटा wrote 8 months ago: मैं ख़ुदाओं के बीच सो रहा (a poem by ravi kumar, rawatbhata) उसने मुझसे ख़ुदा के नूर के बारे में पूछा … more →

Tags: ख़ुदा, रोटी, जन्नत, जहन्नुम

ज़माना ख़ुदकुशी कर लेगा एक दिन6 comments

रवि कुमार, रावतभाटा wrote 8 months ago: ज़माना ख़ौफ़ज़दा है हमसे (a poem by ravi kumar, rawatbhata) ज़माना परेशान है कि हमारे पुरसुकून चहरों पर प … more →

Tags: जमाना, ख़ुदकुशी


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