मुक्तिबोध की एक छोटी कविता विचार आते हैं विचार आते हैं – लिखते समय नहीं लिखते समय नहीं बोझा ढोते वक्त पीठ पर सिर पर उठाते समय भार परिश्रम करते समय चाँद उगता है व पानी में झलमलाने लगता है हृदय के… more →
अनहद नादPRIYANKAR wrote 3 days ago: मुक्तिबोध की एक छोटी कविता विचार आते हैं विचार आते हैं – लिखते समय नहीं लिखते समय नहीं बोझा ढो … more →
PRIYANKAR wrote 1 week ago: दूर तारा तीव्र – गति अति दूर तारा वह हमारा शून्य के विस्तार नीले में चला है ! और नीचे लोग उस को देखत … more →
PRIYANKAR wrote 1 week ago: दिमाग़ी गुहान्धकार का ओरांगउटांग स्वप्न के भीतर स्वप्न, विचारधारा के भीतर और एक अन्य सघन विचारधारा प … more →
PRIYANKAR wrote 1 week ago: ’ब्रह्मराक्षस’ और ’अंधेरे में’ वे प्रतिनिधि कविताएं हैं जिनसे मुक्तिबोध की कविता और उनकी रचना प्रक्र … more →
PRIYANKAR wrote 2 weeks ago: ’ब्रह्मराक्षस’ और ’अंधेरे में’ वे प्रतिनिधि कविताएं हैं जिनसे मुक्तिबोध की कविता और उनकी रचना प्रक्र … more →
PRIYANKAR wrote 1 month ago: हरीश भादाणी (1933-2009) हरीश भादाणी गीत के बुनकर थे और कलम के हलवाहे . वे हरफ़ों के फूल खिलाने व … more →
PRIYANKAR wrote 3 months ago: रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की एक कविता किसको नमन करूं मैं तुझको या तेरे नदीश, गिरि, वन क … more →
PRIYANKAR wrote 4 months ago: अरुण कमल की एक कविता उम्मीद आज तक मैं यह समझ नहीं पाया कि हर साल बाढ़ में पड़ने के बाद भी लोग द … more →
PRIYANKAR wrote 4 months ago: अनामिका की एक कविता पहली पेंशन श्रीमती कार्लेकर अपनी पहली पेंशन लेकर जब घर लौटीं– सारी निलम्बि … more →
PRIYANKAR wrote 4 months ago: अज्ञेय की एक कविता मैंने आहुति बन कर देखा मैं कब कहता हूं जग मेरी दुर्धर गति के अनुकूल बने, मैं … more →
PRIYANKAR wrote 4 months ago: आलोक श्रीवास्तव की कविता-3 हिंदी का लेखक कहां है मुर्शिदाबाद ? कौन आज भी पराजित होता है प्लासी … more →
PRIYANKAR wrote 4 months ago: आलोक श्रीवास्तव की एक कविता-2 एक भाषा का विषाद काल मैंने नाविक से कहा ’ले चल मुझे भुलावा देकर’ … more →
PRIYANKAR wrote 4 months ago: मूल्यांकन कविगण अमर होना चाहते हैं समकालीन यथार्थ से टकराते-टूटते कविगण कर रहे हैं समय का अनुव … more →
PRIYANKAR wrote 5 months ago: ज्ञानदत्त जी के आदेश पर कोलकाता के हमारे अत्यंत प्रिय वरिष्ठ कवि-गीतकार दादा छविनाथ मिश्र का एक और … more →
PRIYANKAR wrote 5 months ago: कन्हैयालाल सेठिया (1919-2008) ( विरल ही किसी कवि के गीत को वह मान्यता मिलती है जिसके त … more →
PRIYANKAR wrote 5 months ago: (1861-1941) रवीन्द्रनाथ ठाकुर का एक गीत (बांग्ला से अनुवाद : प्रयाग शुक्ल) मरण आएगा जिस दिन द्वार … more →
PRIYANKAR wrote 5 months ago: प्रार्थना : गुरु कबीरदास के लिए परम गुरु दो तो ऐसी विनम्रता दो कि अंतहीन सहानुभूति की वाणी बोल सकूँ … more →
PRIYANKAR wrote 6 months ago: (1927-1983) सर्वेश्वरदयाल सक्सेना की एक कविता तुम्हारे साथ रहकर तुम्हारे साथ रहकर अक्सर मुझे … more →
PRIYANKAR wrote 6 months ago: अरुण कमल अरुण कमल की एक कविता अपनी पीढी के लिए वे सारे खीरे जिनमें तीतापन है हमारे लिए वे … more →