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Blogs about: कविता

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आज कल ना जाने क्यों घर की याद आती है ....1 comment

ratnakarmishra wrote 7 hours ago: कब वो बचपन बीता …नहीं याद है हम को …. कब हमने जवानी मैं कदम रखा … नहीं याद है हम क … more →

Tags: Hindi Poem

नई पीढ़ी को मौक़ा-हास्य व्यंग्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 4 days ago: अपने विरोधी पर शब्द प्रहार करते हुए उन्होंने कहा ‘वह बरसों जनता की सेवा में लगे हैं लोग भी अब उनके च … more →

Tags: मस्तराम, समाज, हिंदी पत्रिका, हिन्दी, Deepak bapu, Deepak bharatdeep, Hindi Blogging, hindi internet, Hindi knowledge

दो कविताएं / जनम दिन / अफ़लातून10 comments

अफ़लातून wrote 4 days ago: जनम दिन १. जीर्ण कपड़ा उतार कर नया पहनना पुनर्जीवन है - मेरे गले यह बात अब तक नहीं उतरी | कुशन पर धु … more →

Tags: Hindi Poem, Kavita, अफलातून, अफ़लातून, जनम दिन, जन्म दिवस, जन्मदिन, वर्ष गांठ, वासांसिजीर्णानि

दिल और कविता-हिंदी कविता (dil aur kavita-hindi shayri)

दीपक भारतदीप wrote 1 week ago:   कभी गम तो कभी खुशी कभी दर्द तो कभी हँसी के साथ कविता लिखने का ख्याल किया तब भाषा सज … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, मस्तराम, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, हिन्दी शायरी, हिन्दी शेर, कला, मनोरंजन

शिवराम की कविताएं21 comments

रवि कुमार, रावतभाटा wrote 1 week ago: शिवराम की कविताएं कोटा में शिवराम की तीन कविता पुस्तकों का विमोचन था। इस अवसर पर, उनकी कविताओं पर कु … more →

Tags: अन्य कवियों की कविता, शिवराम, महाभारत, व्यथा, शिवराम

जख्म दिल पर (गझल) - घनश्याम ठक्कर

kalapiketan wrote 1 week ago: जख्म दिल पर  (गझल)  घनश्याम ठक्कर … more →

Tags: गझल, गझल - घनश्याम ठक्कर, घनश्याम ठक्कर, साहित्य, हिंदी साहित्य, हिन्दी कविता, हिन्दी गझल, हिन्दी नेट, हिन्दी ब्लोग

भाभा का नाभिकीय स्वप्न

Dr. Rashmi Varshney wrote 1 week ago: (वैज्ञानिक, अप्रैल-सितंबर, 2005, वर्ष 37, अंक2/3 में प्रकाशित) सभी ऊर्जाओं में परम है परमाणु ऊर्जा। … more →

युद्ध और सत्संग-व्यंग्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 2 weeks ago: धर्म के लिए अब नहीं होता सत्संग हर कोई लड़ रहा है, उसके नाम पर जंग. किताबों के शब्द का सच अब तलवार स … more →

Tags: inglish, हिन्दी, अभिव्यक्ति, ताल-बेताल, Internet, Education, Friends, दृश्य, Religion

राधाकी व्यथा (गीत) - घनश्याम ठक्कर

kalapiketan wrote 2 weeks ago: राधाकी व्यथा (गीत) घनश्याम ठक्कर … more →

Tags: गीत, गीत -घनश्याम ठक्कर, गीत-काव्य, घनश्याम ठक्कर, साहित्य, हिंदी साहित्य, हिन्दी कविता, हिन्दी गीत, हिन्दी नेट

ख्वाब

Maheep Saraf wrote 2 weeks ago: आज कुछ होश नहीं बस तेरी यादें हैं साथ में  तेरी आँखें तेरी बातें तेरी खुश्बू मेरी हर बात में  हर ख्व … more →

Tags: साहित्य, हिन्दी, Hindi Poems, Hindi Poems: Romantic, Romantic, ख्वाब, शायरी, hindi, Literature

असली इंसान की तरह जिएंगे - मार्क्स19 comments

रवि कुमार, रावतभाटा wrote 3 weeks ago: असली इंसान की तरह जिएंगे – मार्क्स ( a kavita poster by ravi kumar, rawatbhata) शब्दों के कुछ … more →

Tags: कविता-पोस्टर, इंसान, कार्ल मार्क्स

कश्मीर1 comment

प्रवीण wrote 3 weeks ago: स्वर्ग को चूम, खुशीओं की हवायें बिखर गई, अनजान अनदेखी दिशाओं में, जब जब घाटी में जली बर्फ़, सपनों को … more →

Tags: हिंदी कविता, कविता ब्लॉग, हिंदी ब्लॉग, कश्मीर, Hindi Poem, Kavita, Hindi Kavtia, घाटी, स्वर्ग

अहसास

Hemant Patel wrote 4 weeks ago: तुम हो ही नही तुम्हारे होने का अहसास है और यहा अभी इस पल इस खुरदुरे पन्ने से निकलकर अहसास से विश्वास … more →

Tags: साहित्य, अहसास, विश्वास

बता तुझको हुआ क्या है ?1 comment

राजेश रंजन wrote 4 weeks ago: ए अमरवीर , ए भरतपुत्र बता तुझको हुआ क्या है ? परिस्थितियों का दास बनकर, खो दिया उल्लास तुमने, अपने ब … more →

क्या यही है महानगर ?6 comments

seedheebaat wrote 1 month ago: ऊंची इमारतों के बीच, अंतहीन सड़कों पर, ना जाने किसे पीछे करने की होड़ में, लोग भागते जा रहे हैं। कंक … more →

Tags: महानगर, राजीव कुमार, सीधी बात

अभी मैं अधूरा10 comments

Hemant Patel wrote 1 month ago: अभी तो खाली हू… अभी तो प्यासा हू… अभी तो अधूरा हू…अभी मै हू ही नही निर्माण के प्रथ … more →

Tags: साहित्य, अधूरा

मेरे दिन रात 1 comment

प्रवीण wrote 1 month ago: दिन, दिन तू ये कहने को है ! रात, रात तू ये कहने को है! हमारी रात तू तब होती है, जब आपकी जुल्फ़ की चि … more →

Tags: हिंदी कविता, कविता ब्लॉग, हिंदी ब्लॉग, दिन, रात, Hindi Poem, Kavita, Hindi Kavtia

बीमार तेरे नामके! (गीत) - घनश्याम ठक्कर 2 comments

kalapiketan wrote 1 month ago: बीमार तेरे नामके! (गीत) घन-’श्याम’ ठक्कर … more →

Tags: गीत, गीत -घनश्याम ठक्कर, गीत-काव्य, घनश्याम ठक्कर, साहित्य, हिंदी साहित्य, हिन्दी कविता, हिन्दी गीत, हिन्दी नेट

चल तू अकेला - रवींद्रनाथ टैगोर (हिन्दी भाषांतर : घनश्याम ठक्कर) 2 comments

kalapiketan wrote 1 month ago: हमारी प्राथमिक शालामें कई अभिप्रेरक कविताएं पढनेकी/गानेकी परंपरा थी. आयु के उस सूर्योदय कालमें कुछ ऐ … more →

Tags: गीत, गीत-काव्य, घनश्याम ठक्कर, रवींद्रनाथ टैगोर, साहित्य, हिंदी साहित्य, हिन्दी कविता, हिन्दी गीत, हिन्दी नेट


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