ratnakarmishra wrote 7 hours ago: कब वो बचपन बीता …नहीं याद है हम को …. कब हमने जवानी मैं कदम रखा … नहीं याद है हम क … more →
दीपक भारतदीप wrote 4 days ago: अपने विरोधी पर शब्द प्रहार करते हुए उन्होंने कहा ‘वह बरसों जनता की सेवा में लगे हैं लोग भी अब उनके च … more →
अफ़लातून wrote 4 days ago: जनम दिन १. जीर्ण कपड़ा उतार कर नया पहनना पुनर्जीवन है - मेरे गले यह बात अब तक नहीं उतरी | कुशन पर धु … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 week ago: कभी गम तो कभी खुशी कभी दर्द तो कभी हँसी के साथ कविता लिखने का ख्याल किया तब भाषा सज … more →
रवि कुमार, रावतभाटा wrote 1 week ago: शिवराम की कविताएं कोटा में शिवराम की तीन कविता पुस्तकों का विमोचन था। इस अवसर पर, उनकी कविताओं पर कु … more →
kalapiketan wrote 1 week ago: जख्म दिल पर (गझल) घनश्याम ठक्कर … more →
Dr. Rashmi Varshney wrote 1 week ago: (वैज्ञानिक, अप्रैल-सितंबर, 2005, वर्ष 37, अंक2/3 में प्रकाशित) सभी ऊर्जाओं में परम है परमाणु ऊर्जा। … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 weeks ago: धर्म के लिए अब नहीं होता सत्संग हर कोई लड़ रहा है, उसके नाम पर जंग. किताबों के शब्द का सच अब तलवार स … more →
kalapiketan wrote 2 weeks ago: राधाकी व्यथा (गीत) घनश्याम ठक्कर … more →
Maheep Saraf wrote 2 weeks ago: आज कुछ होश नहीं बस तेरी यादें हैं साथ में तेरी आँखें तेरी बातें तेरी खुश्बू मेरी हर बात में हर ख्व … more →
रवि कुमार, रावतभाटा wrote 3 weeks ago: असली इंसान की तरह जिएंगे – मार्क्स ( a kavita poster by ravi kumar, rawatbhata) शब्दों के कुछ … more →
प्रवीण wrote 3 weeks ago: स्वर्ग को चूम, खुशीओं की हवायें बिखर गई, अनजान अनदेखी दिशाओं में, जब जब घाटी में जली बर्फ़, सपनों को … more →
Hemant Patel wrote 4 weeks ago: तुम हो ही नही तुम्हारे होने का अहसास है और यहा अभी इस पल इस खुरदुरे पन्ने से निकलकर अहसास से विश्वास … more →
राजेश रंजन wrote 4 weeks ago: ए अमरवीर , ए भरतपुत्र बता तुझको हुआ क्या है ? परिस्थितियों का दास बनकर, खो दिया उल्लास तुमने, अपने ब … more →
seedheebaat wrote 1 month ago: ऊंची इमारतों के बीच, अंतहीन सड़कों पर, ना जाने किसे पीछे करने की होड़ में, लोग भागते जा रहे हैं। कंक … more →
Hemant Patel wrote 1 month ago: अभी तो खाली हू… अभी तो प्यासा हू… अभी तो अधूरा हू…अभी मै हू ही नही निर्माण के प्रथ … more →
प्रवीण wrote 1 month ago: दिन, दिन तू ये कहने को है ! रात, रात तू ये कहने को है! हमारी रात तू तब होती है, जब आपकी जुल्फ़ की चि … more →
kalapiketan wrote 1 month ago: बीमार तेरे नामके! (गीत) घन-’श्याम’ ठक्कर … more →
kalapiketan wrote 1 month ago: हमारी प्राथमिक शालामें कई अभिप्रेरक कविताएं पढनेकी/गानेकी परंपरा थी. आयु के उस सूर्योदय कालमें कुछ ऐ … more →