कितना अच्छा होगा जब एक ही किताब पढ़ायी जायेगी दिल्ली से सुदूर गाँव तक. बिजली का क्या है दिल्ली में भी कायम नही रहती. रास्ते में गड्ढे के लिये भी जरूरी नहीं है किसी गाँव मे होना. हस्पताल के दरवाजे पर मर… more →
परिचर्चाsonyagee wrote 1 day ago: सर्द मौसम से दामन बचाते गिलाफो में खुद को छुपाते काफ़ी की गरम चुस्की लगाते यूं ही अचानक… तेर … more →
दरभंगिया wrote 3 days ago: कितना अच्छा होगा जब एक ही किताब पढ़ायी जायेगी दिल्ली से सुदूर गाँव तक. बिजली का क्या है दिल्ली में भी … more →
दरभंगिया wrote 4 days ago: लगे आपको “अप्रतिम” वह शब्द कहाँ से लाऊँ मैं. स्वरचित अज्ञान शिविर में जब तड़प रहा हूँ हर … more →
दरभंगिया wrote 1 week ago: एक लड़की पर तेज़ाब डाला गया. दूसरी जींस पहन कर घूम रही थी. तीसरी ने अपनी माँ की हत्या कर दी. चौथी को स … more →
प्रवीण wrote 1 week ago: आज की मायावादी दुनिया में, कुछ मायावादी है… आसमान पर थूकते है. और भूल जाते है, यह स्वतंत्र आसम … more →
दरभंगिया wrote 1 week ago: हे आगंतुक गण! तनिक सुनो! चाँद के गिर्द तारों के समान, समंदरी रेत पर पाँव के निशान, शादी के कार्डों प … more →
प्रवीण wrote 1 week ago: पक्ष: चुनाव हुआ. नयी सरकार बनी. सरकार धर्मनिरपेक्ष है. आरक्षण के पक्ष में है, गरीबो के बारे में … more →
दरभंगिया wrote 1 week ago: कुछ दिनों से सोच रहा था क्या क्या नहीं किया कितने सालों से. कि हल्के से यह दिल भींचा आंख मली कि समझ … more →
sonyagee wrote 1 week ago: वक़्त किसका हुआ बोलो वक्त ने साथ किसका दिया न वो माझी का हो पाया न होगा आते कल का ….. * वक़्त … more →
प्रवीण wrote 1 week ago: प्यार क्या है! वो नहीं जानते … हर मुस्कुराहट को ख़ुशी समझे लेते है ! प्यार क्या है! हम नहीं ज … more →
दरभंगिया wrote 1 week ago: लंका, पाक और नेपाल तिब्बत, बर्मा और बंगाल. हाय रे भारत का भाग्य मिले पड़ोसी सब जंजाल. भये आजादी को स … more →
प्रवीण wrote 1 week ago: आपकी याद में दिन गुजर जाता है पर इस रात का क्या करे… जो आ कर रुक सी जाती है! ये आपका चाँद … more →
प्रवीण wrote 1 week ago: चाँदनी रात है और … मेरी तन्हाई है ! जिंदिगी क्या है! मैं अनगिनत तारो में खोज रहा हू! हर तारा आ … more →
दीपक wrote 1 week ago: (१) शब्दों के खण्डहर अतीत से जुड़े हैं, जहाँ कभी बिन शब्दों के बातें होती थीं। (२) शब्दों से … more →
kalapiketan wrote 1 week ago: याद आया गझल घनश्याम ठक्कर … more →
ambuj wrote 2 weeks ago: खुबसूरत थे वोह पल जब तुम साथ थे मासूम थे वोह पल जब तुम साथ थे नाज़ था हमे खुद पे जब तुम साथ थे जलते … more →
दरभंगिया wrote 2 weeks ago: इधर कुछ बकवास कवितायें पढ़ने को मिली, तो सोचा पोपुलारिटी बढ़ाने के लिए हम भी एक बकवास लिखें. हो सकता … more →
kalapiketan wrote 2 weeks ago: चैतकी रजनी और् चंद्रमा अछांदस घनश्याम ठक्कर … more →
दरभंगिया wrote 2 weeks ago: बेकार की लफ्फाजी ही करनी है ना! तो कर देंगे. और बन जायेगी एक कविता. बिन अर्थ, बेकार. ऐसा नहीं है. हर … more →