हम कवि हैं या मसखरे सब को हँसाते जनता का दिल लुभाते कविता याने कि कैसी हो बहती नदी जैसी हो पहले कविता लिखी छन्द में बोले संपादक जी – अमां यार कुछ नया लिखो कि कविता संवरे क्या ये कलि और भंवरे! गय… more →
हरिहर झाAmi Jha wrote 12 months ago: आ बचवा , चल चीलम लगा दे ! रात भई, जी अकुलाता है कैसा तो होता जाता है उ ससुरा रामदस्वा सरवा अब तक राम … more →
Harihar Jha हरिहर झा wrote 1 year ago: हम कवि हैं या मसखरे सब को हँसाते जनता का दिल लुभाते कविता याने कि कैसी हो बहती नदी जैसी हो पहले कवित … more →