माशुका ने शायर से कहा ‘बहुत बुरा समय था जब मैंने अपनी सहेलियों के सामने किसी शायर से शादी करने की कसम खाई तुमने मेरे इश्क में कितने शेर लिखे पर किसी मुशायरे में तुम्हारे शामिल होने की खबर अखबार में न… more →
****दीपकबापू कहिन**** ****Deepak Bharatdeep's hindi patrika****विनय wrote 2 months ago: वह मुस्कुराया और रूठा भी वह सच्चा है और झूठा भी दूर था तो क़रीब था दिल के उसकी बात से दिल टूटा भी इक … more →
दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: माशुका ने शायर से कहा ‘बहुत बुरा समय था जब मैंने अपनी सहेलियों के सामने किसी शायर से शादी करने की कस … more →
विनय wrote 1 year ago: तेरी जो ख़ाहिश करता हूँ क्या कोई गुनाह करता हूँ चाहे जो भी समझ ले तू मैं तुझसे प्यार करता हूँ यह उम् … more →
विनय wrote 1 year ago: मेरी बाइसे-ज़ीस्त, तुमको इक नज़र देखने के बाद मैं क्यों मुदाम तुम्हारी जानिब खिंचता रहता हूँ? क्यों इक … more →
विनय wrote 1 year ago: धीरे-धीरे उतरती है साँस सीने में यह दर्द बड़ा बेदर्द है सीने में लुत्फ़ जीने क सब ख़त्म हो गया … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: रक्षा बंधन के अवसर पर उसकी सब प्रेयसियो ने मिलने में असमर्थता जताई प्रियतम को तो कोई बहिन नहीं … more →
विनय wrote 1 year ago: नामालूम वह दिन मैंने जन्नत में गुज़ारे या जहन्नुम में मगर बीते हुए दिन मुझे आज भी ढ़ूँढते हैं वह ताने … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: इलाके की जर्जर सड़कों पर मचा हुआ था चारों तरफ बवाल अमले का घेराव रोज हो रहा था माहोल था बदहाल आखि … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: डाक्टर साहब ने रास्ते में स्कूटर रोककर कबाड़ी से कहा ‘तुम कालोनी में आते हो पर हमारे घर … more →