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Blogs about: कशिश

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भीड़ में गुलाम-व्यंग्य कविता (soch ke gulam-vyangya kavita)

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: हम यूं तन्हा नही रह जाते अगर उस भीड़ में शामिल होते। सभी चले जा रहे थे उम्मीदों के गीत गा रहे थे हमने … more →

Tags: अनुगूंज, अभिव्यक्ति, आदमी, कविता, क्षणिका, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, व्यंग्य

वह मुस्कुराया और रूठा भी10 comments

विनय wrote 7 months ago: वह मुस्कुराया और रूठा भी वह सच्चा है और झूठा भी दूर था तो क़रीब था दिल के उसकी बात से दिल टूटा भी इक … more →

Tags: मेरी ग़ज़ल, Attraction, ख़ाब, छाला, झूठा, दिल, मुस्कुराया, रूठा, सच्चा

मेहरबानी कर तोहफे में जल्दी दो जुदाई-हास्य हिंदी शायरी

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: माशुका ने शायर से कहा ‘बहुत बुरा समय था जब मैंने अपनी सहेलियों के सामने किसी शायर से शादी करने की कस … more →

Tags: vews, inglish, कविता, अभिव्यक्ति, शायरी, हास्य व्यंग्य, व्यंग्य, व्यंग्य कविता, Internet

तेरी जो ख़ाहिश करता हूँ

विनय wrote 1 year ago: तेरी जो ख़ाहिश करता हूँ क्या कोई गुनाह करता हूँ चाहे जो भी समझ ले तू मैं तुझसे प्यार करता हूँ यह उम् … more →

Tags: मेरा गीत, इश्क़, Heart, Love, eyes, दिल, प्यार, मोहब्बत, तन्हा

मेरी बाइसे-ज़ीस्त

विनय wrote 1 year ago: मेरी बाइसे-ज़ीस्त, तुमको इक नज़र देखने के बाद मैं क्यों मुदाम तुम्हारी जानिब खिंचता रहता हूँ? क्यों इक … more →

Tags: ख़त/पयाम, ज़िन्दगी, चाँद, इश्क़, Love, प्यार, मोहब्बत, वफ़ा, जज़्बात

धीरे-धीरे उतरती है साँस सीने में

विनय wrote 1 year ago: धीरे-धीरे उतरती है साँस सीने में यह  दर्द  बड़ा  बेदर्द  है  सीने  में लुत्फ़ जीने क सब ख़त्म हो गया … more →

Tags: मेरी ग़ज़ल, Attraction, आँखें, आबला-पा, आस, इश्क़, ख़त्म, दर्द, धीरे

उसने मोबाइल की घंटी बजाई वह राखी लेकर आई

दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: रक्षा बंधन के अवसर पर उसकी   सब प्रेयसियो ने  मिलने में असमर्थता जताई   प्रियतम को तो कोई  बहिन नहीं … more →

Tags: arebic, अभिव्यक्ति, कविता, क्षणिका, ताल-बेताल, देश-दुनिया, रक्षाबंधन, व्यंग्य, व्यंग्य कविता

मगर बीते हुए दिन मुझे आज भी ढ़ूँढते हैं...

विनय wrote 2 years ago: नामालूम वह दिन मैंने जन्नत में गुज़ारे या जहन्नुम में मगर बीते हुए दिन मुझे आज भी ढ़ूँढते हैं वह ताने … more →

Tags: मेरी नज़्म, Attraction, आँसू, इंतज़ार, गोया, चुभन, जन्नत, जहन्नुम, टीस

सड़क ऐसी बनीं जैसे चिकने गाल

दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: इलाके की जर्जर सड़कों पर  मचा हुआ था चारों तरफ बवाल अमले का घेराव रोज हो रहा था माहोल  था बदहाल  आखि … more →

Tags: Blogroll, व्यंग्य, व्यंग्य कविता, Bloging, Art, bharat

कबाड़ और इंजेक्शन

दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: डाक्टर साहब ने रास्ते में  स्कूटर   रोककर कबाड़ी से कहा  ‘तुम कालोनी  में आते हो  पर हमारे घर … more →

Tags: arebic, Art, अभिव्यक्ति, क्षणिका, चरित्र, व्यंग्य, व्यंग्य कविता, शायरी, हास्य व्यंग्य


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