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Blogs about: कहकशां

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तस्कीन-ए-दिल-ए-महज़ू न हुई

Amarjeet Singh wrote 1 year ago: तस्कीन-ए-दिल-ए-महज़ू न हुई वो सई-ए-क़रम फ़रमा भी गए इस सई-ए-क़रम का क्या कहिये बहला भी गए तड़पा भी गए हम … more →

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रात भर दीदा-ए-ग़म नाक में लहराते रहे

Amarjeet Singh wrote 1 year ago: रात भर दीदा-ए-ग़म नाक में लहराते रहे सांस की तरह से आप आते रहे जाते रहे खुश थे हम अपनी तमन्नाओं का ख़् … more →

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किसी का यूं तो हुआ कौन

Amarjeet Singh wrote 1 year ago: किसी का यूं तो हुआ कौन उम्रभर फिर भी ये हुस्न-ओ-इश्क़ तो धोखा है सब मगर फिर भी हज़ार बार ज़माना इधर से … more →

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इश्क़ के शोले को भड़काओ

Amarjeet Singh wrote 1 year ago: इश्क़ के शोले को भड़काओ कि कुछ रात कटे दिल के अंगारे को दहकाओ कि कुछ रात कटे हिज्र में मिलने शब-ए-मा … more →

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ग़ज़ल का साज़ उठाओ बड़ी उदास है रात5 comments

Amarjeet Singh wrote 1 year ago: ग़ज़ल का साज़ उठाओ बड़ी उदास है रात नवा-ए-मीर सुनाओ बड़ी उदास है रात नवा-ए-दर्द में इक ज़िंदगी तो होती है … more →

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एक चमेली के मंड़वे तले1 comment

Amarjeet Singh wrote 1 year ago: एक चमेली के मंड़वे तले मैकदे से ज़रा दूर उस मोड़पर… दो बदन… दो बदन…… दो बदन प्यार की आग में जल गए प्यार … more →

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देखना जज़्बे मोहब्बत का असर आज की रात2 comments

Amarjeet Singh wrote 1 year ago: देखना जज़्बे मोहब्बत का असर आज की रात मेरे शाने पे है उस शोख़ का सर आज की रात नूर ही नूर है किस सिम्त … more →

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ऐ ग़म-ए-दिल क्या करूं

Amarjeet Singh wrote 1 year ago: शहर की रात और मै नाशाद-ओ-नाकारा फिरूं जगमगाती जागती सड़कों पे आवारा फिरूं ग़ैर की बस्ती है कब तक दर-ब- … more →

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ऐ मलिहाबाद के रंगीं गुलिस्तां अलविदा1 comment

Amarjeet Singh wrote 1 year ago: ऐ मलिहाबाद के रंगीं गुलिस्तां अलविदा अलविदा ऐ सरज़मीन-ए-सुबह-ए-खन्दां अलविदा अलविदा ऐ किशवर-ए-शेर-ओ-श … more →

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अब मेरे पास तुम आई हो तो क्या आई हो?2 comments

Amarjeet Singh wrote 1 year ago: अब मेरे पास तुम आई हो तो क्या आई हो? मैने माना के तुम इक पैकर-ए-रानाई हो चमन-ए-दहर में रूह-ए-चमन आरा … more →

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अब अक्सर चुप-चुप से रहे हैं

Amarjeet Singh wrote 1 year ago: अब अक्सर चुप-चुप से रहे हैं यूं ही कभू लब खोले हैं पहले “फ़िराक़” को देखा होता अब तो बहुत … more →

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हिज़ाब-ए-फ़ितना परवर अब उठा लेती तो अच्छा था1 comment

Amarjeet Singh wrote 1 year ago: हिज़ाब-ए-फ़ितना परवर अब उठा लेती तो अच्छा था खुद अपने हुस्न को परदा बना लेती तो अच्छा था तेरी नीची नज़र … more →

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चुपके चुपके रात दिन आँसू बहाना याद है 2 comments

Amarjeet Singh wrote 3 years ago: चुपके चुपके रात दिन आँसू बहाना याद है हमको अब तक आशिक़ी का वो ज़माना याद है बाहज़ारां इज़्तिराब-ओ-सदहज़ार … more →

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हमदम यही है1 comment

Amarjeet Singh wrote 1 year ago: इज़्न-ए-खिराम लेते हुये आसमां से हम, हटकर चले हैं रहगुज़र-ए-कारवां से हम, क्योंकर हुआ है फ़ाश ज़माने पे … more →

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चुपके चुपके रात दिन आँसू बहाना याद है12 comments

Amarjeet Singh wrote 1 year ago: चुपके चुपके रात दिन आँसू बहाना याद है, हमको अब तक आशिक़ी का वो ज़माना याद है, बाहज़ारां इज़्तिराब-ओ-सदहज़ … more →

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तुझ से रुख़सत की वो1 comment

Amarjeet Singh wrote 1 year ago: तुझ से रुख़सत की वो शाम-ए-अश्क़-अफ़्शां हाए हाए, वो उदासी वो फ़िज़ा-ए-गिरिया सामां हाए हाए, यां कफ़-ए-पा च … more →

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तोड़कर अहद-ए-करम नाआशना हो जाइये,

Amarjeet Singh wrote 1 year ago: तोड़कर अहद-ए-करम नाआशना हो जाइये, बंदापरवर जाइये अच्छा ख़फ़ा हो जाइये, राह में मिलिये कभी मुझ से तो अज़र … more →

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रोशन जमाल-ए-यार से है

Amarjeet Singh wrote 1 year ago: रोशन जमाल-ए-यार से है अन्जुमन तमाम, दहका हुआ है आतिश-ए-गुल से चमन तमाम, हैरत ग़ुरूर-ए-हुस्न से शोखी स … more →

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नज़र वो है के1 comment

Amarjeet Singh wrote 1 year ago: नज़र वो है के जो कौन-ओ-मकां के पार हो जाये, मगर जब रू-ए-ताबां पर पड़े बेकार हो जाये, नज़र उस हुस्न पर ठ … more →

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