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Blogs about: कहानीकथा

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वो डोलत रस आपने उनके फाटत अंग!9 comments

प्रेमलता पांडे wrote 5 months ago: यौं रहीम कैसे निभै, बेरे-केर कौ संग। वो डोलत रस आपनै, उनके फाटत अंग॥ साहित्य अगर बेर का वृक्ष है तो … more →

Tags: फोटोशॉप और मैं, लोभ-लालच, व्यक्तित्व, मौलिकता, स्वाधीनता, व्यक्तिगत, साहित्य और ब्लॉग

उनसे कैसे कहूँ?12 comments

प्रेमलता पांडे wrote 9 months ago: आंटी यह मैं कैसे कहूँ? यह तो इन्हें सोचना चाहिए। पैसे तो सारे मेरी मम्मी ने दिए हैं। मम्मी मुझसे यह … more →

Tags: आजकल का प्यार

अति 7 comments

प्रेमलता पांडे wrote 9 months ago: १. विकि और मोमी दोनों किसी अमेरिकन कंपनी में काम करते थे। लाखों में सेलरिज़ थीं। एक सुपर एच.आई.जी. फ् … more →

Tags: मंदी

और वो चली गई5 comments

प्रेमलता पांडे wrote 10 months ago: जीजान से उसने मदद की। बिल्कुल न सोचा रिश्ता-नाता और न सोचा अपना सम्मान। बस कोल्हू के बैल की भांति सभ … more →

Tags: निबौरी, नीति

यूँ ही तूफ़ान मचा रक्खा है...1 comment

प्रेमलता पांडे wrote 10 months ago: १ ’चन’ अपनी पाँच बहनों में नंबर तीन की है। पिता की बहुत पुरानी चश्मे की दुकान थी जो पिता के बूढ़ेपन क … more →

Tags: मुश्किल ज़िंदगी, साहस और मेहनत

मैं बिधवा हो जाऊँ!2 comments

प्रेमलता पांडे wrote 1 year ago: जनिया के पति की मृत्यु हुए कई साल हो गए। बेचारी जनिया का कोई धीर धरने वाला नहीं था। दो छोटे-छोटे बच् … more →

Tags: विधवा, परवरिश

से’लिब्रेशन5 comments

प्रेमलता पांडे wrote 1 year ago: न्मय और ममता कई दिन से घर सजा रहे हैं। सजाते भी क्यों न? उनकी बहु की पहली दिवाली थी। बहु-बेटा विदेश … more →

Tags: सेलिब्रेशन, दिवाली\दीपावली

अपनी-अपनी राम-कहानी2 comments

प्रेमलता पांडे wrote 1 year ago: रामदेई परेशान सोचती जा रही थी कि तभी बड़ी तेज़ी से एक बस उसके बिल्कुल पास आकर रुक गयी। रामदेई घबरायी ह … more →

Tags: राम-कहानी, मनःस्थिति

व्यर्थ की बातों से मुँह मोड़ लें 2 comments

प्रेमलता पांडे wrote 1 year ago: बचपन में ही मोना ने ज़िंदगी का फलसफ़ा समझ लिया था। पिता शराबी थे। उसने उन्हें कभी बिना नशे के नहीं देख … more →

Tags: माँ, मोना, स्त्री-दशा और बदलाव

नेहा की छतरी2 comments

प्रेमलता पांडे wrote 1 year ago: कल से मौसम पंगे ले रहा है। कभी तेज हवा और बारिश तो कभी तेज धूप और उमस! नेहा परीक्षा देने आयी तो छतरी … more →

Tags: छतरी, नेहा, अब्बू

सब नाटक है...1 comment

प्रेमलता पांडे wrote 1 year ago: एक बार एक स्त्री जो किसी बड़े खानदान और वंश की थी अचानक आयी परेशानियों से अकेली रह गयी। उसका पूरा परि … more →

Tags: समाज और दया

आवारा औरत4 comments

प्रेमलता पांडे wrote 1 year ago: मंजुला दो भाइयों की अकेली बहिन थी। छोटे से क़स्बे में पली-बढ़ी मंजुला ने स्नातकोत्तर तक की शिक्षा प्रा … more →

Tags: आवारा, औरत


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