सुबह दीपक बापू सड़कों पर पानी से भरे गड्ढों में गिरने से बचते हुए जल्दी जल्दी ही आलोचक महाराज के घर पहुंचे। उस दिन बरसात होने से उनको आशा थी कि आलोचक महाराज प्रसन्न मुद्रा में होंगे। इधर उमस के मारे सभ… more →
दीपक भारतदीप की शब्द- पत्रिकायोगेन्द्र जोशी wrote 1 week ago: प्रदर्शन की लालसा या प्रवृत्ति प्रायः हर मनुष्य के व्यक्तित्व का एक खास पहलू होता है । मैं इसे एक हा … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 weeks ago: वैसे तो उन सज्जन की कोई इतनी अधिक उम्र नहीं थी कि दृष्टिदोष अधिक हो अलबत्ता चश्मा जरूर लगा हुआ था। ए … more →
योगेन्द्र जोशी wrote 3 weeks ago: रेलगाड़ी से यात्रा करना कभी-कभी असामान्य अनुभव दे जाता है, ऐसे अनुभव जो कभी आनंदित कर जाता है तो कभी … more →
Nidhi KM wrote 3 weeks ago: भरी धूप मे, आज ऑफीस जाते समय ही उसने सोच लिया था, शाम को घर वापस जाते समय, आज मंदिर जाऊंगी… मं … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: सुबह दीपक बापू सड़कों पर पानी से भरे गड्ढों में गिरने से बचते हुए जल्दी जल्दी ही आलोचक महाराज के घर प … more →
gsmeena wrote 1 month ago: पूर्वी राजस्थान में जेठ का एक दिन। धूप ऐसी कि लगता है थोड़ी देर में पेड़-पौधे, मानव सभी मोम की तरह पिघ … more →
महावीर wrote 2 months ago: श्री रूप सिंह चंदेल जी का संक्षिप्त परिचय: १२ मार्च, १९५१ को कानपुर के गाँव नौगवां (गौतम) में जन्मे … more →
Gayatri wrote 2 months ago: शीला के कदम जैसे हवा मे उड़ रहे थे.प्रशासन ने उसकी उम्र क़ैद की सज़ा 14 साल से घटा कर 10 साल कर दी थ … more →
Gayatri wrote 2 months ago: प्रिय मित्रो , यह ब्लॉग इंड़ीब्लागेर पर सर्वशेषठ लघु कथा श्रेणी प्रतियोगिता मे नामांकित हुआ है. अगर … more →
kashyap omprakash wrote 2 months ago: बाजार से गुजरते हुए कुत्ते की नजर दुकान में टंगे एक चित्र पर पड़ी तो गढ़ी की गढ़ी रह गई. उसके लिए उस … more →
Ramesh Nayak wrote 2 months ago: मेरे भाई साहब मुझसे पॉँच साल बडे थे, लेकिन तीन दरजे आगे। उन्होने भी उसी उम्र में पढना शुरू किया था … more →
Gayatri wrote 3 months ago: image courtsey picasa albums पश्याताप – एक लघु कथा आज : आंसू थे की किसना की आँखों का दामन तजते … more →
Gayatri wrote 3 months ago: दीपू आज बहुत खुश था .इतना खुश की ख़ुशी के मारे पूरी रात आँखों ही आँखों में काटी थी, बस कब सुबह हो औ … more →
महावीर wrote 4 months ago: प्राण शर्मा की लघु-कथा पिंजरे के पंछी —प्राण शर्मा चंद्र प्रकाश के चार साल के बेटे को पंछियों से बेह … more →
kashyap omprakash wrote 4 months ago: कुत्ता कवियों और साहित्यकारों से बहुत प्रभावित था. हालांकि कविता उसके लिए दूर की कौड़ी थी. किंतु कवि … more →
राजीव् तनेजा wrote 4 months ago: ***राजीव तनेजा*** “रुक…अबे रुक"…. "ज्जी…मैँ?"…. "ओर तेरा … more →