ना जीने को जी करता है ना मरने को जी करता है तू नहीं है जो साथ मेरे साथ रहने को जी करता है खो गया हूँ तन्हाइयों में कहीं न कोई शाद है न दर्द है कहीं बिछायी-बिछायी काँटों की तह है… more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 1 year ago: ना जीने को जी करता है ना मरने को जी करता है तू नहीं है जो साथ मेरे साथ रहने क … more →
विनय wrote 1 year ago: चढ़ गयी रे मस्ती चढ़ गयी रे चढ़ गयी रे तेरे हुस्न की मस्ती चढ़ गयी रे मस्ती चढ़ गयी रे तेरे हुस्न की … more →
विनय wrote 1 year ago: यादों का सागर गहरा है उसमें डूब जाऊँ तो वक़्त का हर लम्हा ठहरा है कोई काँटा-सा है जो लग गया है इक फाँ … more →