तीन कविताएं(१) मेरी आंखों में उमडते हुए समंदर की हरएक बुंद में तेरी तस्वीर बंद है . तेरी हरएक तस्वीर को मैं झांका करता हूं चोरी-चोरी, चूपके-चूपके । मेरे होठों पर कई दिनों से तितली बैठने नहीं आयी । मेर… more →
विजयकुमार दवे / Vijaykumar Daveदीपक भारतदीप wrote 6 months ago: बेच रहे हैं मनोरंजन कहते हैं उसे खबरें भाषा के शब्दकोष से चुन लिए हैं कुछ ख़ास शब्द उनके अर्थ की बन … more →
vijaykumardave wrote 1 year ago: तीन कविताएं(१) मेरी आंखों में उमडते हुए समंदर की हरएक बुंद में तेरी तस्वीर बंद है . तेरी हरएक तस्वीर … more →