संयत देह के भीतर कैसी धधक रही है ज्वाला आँच नियन्त्रण से बाहर हो कर ना दे मुंह… more →
Harihar Jha हरिहर झा wrote 4 months ago: संयत देह के भीतर कैसी धधक रही है ज्वाल … more →
Tags: गीत, हिन्द-युग्म, अभिव्यक्ति, दमन
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