मेरे वजूद को यूँ तेरे काम आना है जिगर का लख़्त लख़्त होंठ पर सजाना है न जाने क्या कहा है शम्अ ने परवाने से के अब उसे तो जल के ख़ाक ही हो जाना है जो तूने कह दिया तो तर्क़ेमोहब्ब्त कर ली जज़ा में अब भले ही ह… more →
इक शायर अंजाना सा...Harihar Jha हरिहर झा wrote 7 months ago: रजनी जग को सुलाये सहे तिमिर का वार नभ खुश हो पहनाये चांद-तारों का हार बन के खुद आइना रहा रूप को निखा … more →
Rohit Jain wrote 9 months ago: मेरे वजूद को यूँ तेरे काम आना है जिगर का लख़्त लख़्त होंठ पर सजाना है न जाने क्या कहा है शम्अ ने परवान … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: पता नहीं कब कैसे इस देश में यह परंपरा शुरू हुई कि बाहर से जब तक आदमी प्रमाण पत्र नहीं मिले उसे घर मे … more →
माधव त्रिपाठी wrote 1 year ago: हमेशा ही तो नही होता काम कभी थक जाता है इंसान रुक जाते हैं हाँथ दिमाग हो जाता है शांत कभी तो कलाकार … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: कोई भी इस जहां में ना कहीं बरबाद रहे जो जहां पर भी रहे खुश रहे आबाद रहे ना रहें मंदिरें ना मस्जिदें … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: बहुत दिनों से ग़ैरहाज़िर हूँ जिसके लिये माफ़ीगुज़ार हूँ. अपनी हालत बयां करने के लिये एक फ़ैज़ साहब का शेर … more →
Harihar Jha हरिहर झा wrote 1 year ago: रजनी जग को सुलाये सहे तिमिर का वार नभ खुश हो पहनाये चांद-तारों का हार बन के खुद आइना रहा रूप को निखा … more →
प्रेमलता पांडे wrote 3 years ago: काम कोई बुरा नहीं है, काम कोई बड़ा नहीं है, काम किया है विवेक से, समाज-कल्याण की भावना से, काम किया ह … more →