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Blogs about: कार्ल मार्क्स

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चुनाव, राजनीतिक दल और बुद्धिजीवी

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 2 weeks ago: हमने लिखा था कि वर्तमान संसदीय प्रणाली द्वारा मजदूर वर्ग कभी सत्ता प्राप्त नहीं कर सकता. लेकिन इसका … more →

Tags: आह्वान, एंगेल्स, कम्युनिस्ट, क्रांति, पूंजीवादी संकट, बुर्जुआ लोकतंत्र, मार्क्सवाद, समाजवाद, सर्वहारा

असली इंसान की तरह जिएंगे - मार्क्स19 comments

रवि कुमार, रावतभाटा wrote 3 weeks ago: असली इंसान की तरह जिएंगे – मार्क्स ( a kavita poster by ravi kumar, rawatbhata) शब्दों के कुछ … more →

Tags: कविता-पोस्टर, इंसान, कविता

कम्युनिस्ट और मजदूर वर्ग की पार्टियाँ

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 4 months ago: घोषणापत्र का यह वाक्य कि “कम्युनिस्ट मजदूर वर्ग की पार्टियों के बदले में अपनी कोई अलग पार्टी न … more →

Tags: कम्युनिस्ट, विरासत, सर्वहारा, कम्युनिस्ट पार्टी क, डेविड रियाज़ानोव, मजदूर वर्ग की विरासत, व्याख्यात्मक टिप्पण

पूंजीवादी संचय मेहनतकश वर्ग के दरिद्रीकरण और अध:पतन की ओर -- सम्पत्तिहर्त्ताओं के सम्पत्तिहरण की ओर ले जाता है

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 5 months ago: 31.  ‘कम्युनिस्ट मेनिफेस्टो’ पर डेविड रियाजानोव की व्याख्यात्मक टिप्पणियां उस स्थिति में भी जब मजदूर … more →

Tags: उत्पादक शक्तियां, उत्पादन के संबंध, एंगेल्स, पूंजीवादी संकट, सर्वहारा, कम्युनिस्ट पार्टी क, डेविड रियाज़ानोव, वर्ग चेतना, व्याख्यात्मक टिप्पण

सर्वहारा आन्दोलन के अंतरराष्ट्रीय चरित्र का विकास और क्रांति 1 comment

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 5 months ago: 30.  ‘कम्युनिस्ट मेनिफेस्टो’ पर डेविड रियाजानोव की व्याख्यात्मक टिप्पणियां “वर्ग विरोध पर आधार … more →

Tags: उत्पादक शक्तियां, उत्पादन के संबंध, कम्युनिस्ट, क्रांति, पूंजीवादी संकट, युद्ध, संघर्ष, सर्वहारा, इन्कलाब

सर्वहारा और कानून का सम्मान 2 comments

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 5 months ago: 29.  ‘कम्युनिस्ट मेनिफेस्टो’ पर डेविड रियाजानोव की व्याख्यात्मक टिप्पणियां निजी संपत्ति समस्त पूंजीव … more →

Tags: एंगेल्स, मार्क्सवाद, विरासत, सर्वहारा, कम्युनिस्ट पार्टी क, डेविड रियाज़ानोव, मजदूरों का जीवन, व्याख्यात्मक टिप्पण

बुर्जुआ समाज के अंतरविरोध और सर्वहारा द्वारा इनका उपयोग2 comments

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 5 months ago: 27.  ‘कम्युनिस्ट मेनिफेस्टो’ पर डेविड रियाजानोव की व्याख्यात्मक टिप्पणियां बुर्जुआ वर्ग की कतारों के … more →

Tags: आंदोलन, मार्क्सवाद, विरासत, संघर्ष, सर्वहारा, कम्युनिस्ट पार्टी क, डेविड रियाज़ानोव, मजदूर वर्ग की विरासत, वर्ग चेतना

मैं कार्ल मार्क्स के अतिरिक्त मूल्य के सिद्धांत की इतनी सरल प्रस्तुति सुन रही थी...2 comments

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 5 months ago: जैक लंडन का उपन्यास - देखें : \’आयरन हील\’ और अतिरिक्त मूल्य का नियम सपने का गणित अर्नेस … more →

Tags: उत्पादक शक्तियां, उत्पादन के संबंध, कम्युनिस्ट, पूंजीवादी संकट, मार्क्सवाद, समाजवाद, सर्वहारा, अधिशेष, पुस्तकों सबंधी जानक

श्रम और पूंजी की टक्कर - एक ऐसा 'वैषम्य' जिसका निपटारा बल प्रयोग द्वारा ही होता है 2 comments

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 5 months ago: श्री दिनेशराय द्विवेदी जी द्वारा लिखित आलेख ‘उद्यम भी श्रम ही है‘ और श्री ज्ञानदत्त जी प … more →

Tags: उत्पादक शक्तियां, उत्पादन के संबंध, पुस्तकें, पूंजीवादी संकट, मार्क्सवाद, युद्ध, संघर्ष, सर्वहारा, Marxism

कला-साहित्य-संस्कृति में "लोकवाद" और "स्वदेशीवाद" का विरोध करो!1 comment

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 5 months ago: एक नए सर्वहारा पुनर्जागरण और प्रबोधन के वैचारिक सांस्कृतिक कार्यभार (सांस्कृतिक मोर्चे पर नई शुरुआत … more →

Tags: कविता, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, पूंजीवादी संकट, मार्क्सवाद, विरासत, सर्वहारा, साम्राज्यवाद, एन.जी.ओ

नए सांस्कृतिक कार्यभारों की ज़मीन--- महत्तव्पूर्ण सामजिक-आर्थिक सरंचनागत परिवर्तनों और विश्व-ऐतिहासिक विपर्यय का यह दौर

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 5 months ago: एक नए सर्वहारा पुनर्जागरण और प्रबोधन के वैचारिक सांस्कृतिक कार्यभार (सांस्कृतिक मोर्चे पर नई शुरुआत … more →

Tags: लेनिन, क्रांति, आंदोलन, कम्युनिस्ट, समाजवाद, सर्वहारा, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, पूंजीवादी संकट

अंतर्जाल, मार्क्सवाद और बौद्धिक वेश्यागमनी5 comments

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 5 months ago: मार्क्सवाद के विकास के लिए ज़रूरी है कि मार्क्सवाद को विकसित करने में मार्क्सवादियों के अब तक के अवद … more →

Tags: उत्पादक शक्तियां, उत्पादन के संबंध, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, प्रतिबद्ध, मार्क्सवाद, सर्वहारा, वर्ग चेतना

इस युग का प्रधान वैषम्य : जनतन्तर कथा (34) की हिफाजित में 10 comments

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 6 months ago: “कोट, कपड़ा, आदि उपयोग-मूल्य, अर्थात पण्यों के ढांचे, दो तत्त्वों के योग होते हैं – पदार् … more →

Tags: उत्पादक शक्तियां, उत्पादन के संबंध, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, प्रतिबद्ध, मार्क्सवाद, विचारणीय : मीडिया से, साम्राज्यवाद, Marxism

नई समाजवादी क्रान्ति का उद्घोषक 'बिगुल' के मई-2009 अंक की विषय - सामग्री2 comments

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 6 months ago: मज़दूर वर्ग के लिए सबसे बुरी बातों में से एक शायद यह है कि मई दिवस को आज एक अनुष्ठान बना दिया गया है … more →

Tags: आंदोलन, उदारीकरण, एंगेल्स, कविता, बाल श्रम, बिगुल, भगत सिंह, संघर्ष, सर्वहारा

कांग्रेस की जीत पर अफलातून और सुरेश चिपलूनकर के दुःख में हम भी शरीक होते मगर ... 14 comments

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 6 months ago: जिस देश का प्रधानमंत्री स्वयं स्वीकार करे की देश की 7० प्रतिशत जनता 20 या 20 रूपए से कम पर गुज़ारा कर … more →

Tags: भगत सिंह, लेनिन, आह्वान, कम्युनिस्ट, सर्वहारा, मार्क्सवाद, फासिज्म, आतंकवाद, काले कानून

मई दिवस का इतिहास-2

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 6 months ago: इस पोस्ट का पहला भाग ….यहाँ देखें शिकागो की हड़ताल और हे मार्केट की घटना पहली मई को शिकागो में … more →

Tags: लेनिन, आंदोलन, कम्युनिस्ट, सर्वहारा, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, संघर्ष, फासिज्म, युद्ध

मई दिवस का इतिहास

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 6 months ago: अलेक्जेण्डर ट्रैक्टनबर्ग अनुवाद : अभिनव सिन्हा मई दिवस का जन्म काम के घण्टे कम करने के आन्दोलन से अट … more →

Tags: आंदोलन, उत्पादक शक्तियां, उत्पादन के संबंध, कम्युनिस्ट, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, युद्ध, विरासत, संघर्ष

कार्ल मार्क्‍स के जन्मदिन (5 मई) के अवसर पर 1 comment

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 6 months ago: कार्ल मार्क्‍स फ्रेडरिक एंगेल्स विज्ञान के इतिहास में मार्क्‍स ने जिन महत्त्वपूर्ण बातों का पता लगाक … more →

Tags: एंगेल्स, कम्युनिस्ट, क्रांति, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, पूंजीवादी संकट, बिगुल, मार्क्सवाद, विरासत

पूंजीवाद के खिलाफ मेहनतकश वर्ग के प्रतिरोध के विभिन्न रूप

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 6 months ago: 23.  ‘कम्युनिस्ट मेनिफेस्टो’ पर डेविड रियाजानोव की व्याख्यात्मक टिप्पणियां पूंजीवादी समाज मेहनतकशों … more →

Tags: उत्पादक शक्तियां, उत्पादन के संबंध, एंगेल्स, कम्युनिस्ट, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, पुस्तकें, मार्क्सवाद, विरासत


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