“डण्ड भुज-डण्ड, प्रचण्ड नो खण्ड। प्रगट देवि, तुहि झुण्डन के झुण्ड। खगर दिखा खप्पर लियां, खड़ी कालका। तागड़दे मस्तङ्ग, तिलक मागरदे मस्तङ्ग। चोला जरी का, फागड़ दीफू, गले फुल-माल, जय जय जयन्त। जय … more →
शाबर-मन्त्रaspundir wrote 5 months ago: “डण्ड भुज-डण्ड, प्रचण्ड नो खण्ड। प्रगट देवि, तुहि झुण्डन के झुण्ड। खगर दिखा खप्पर लियां, खड़ी … more →
aspundir wrote 1 year ago: काली-शाबर-मन्त्र सम्मानीय पाठकों, शाबर-मन्त्र के एक पाठक “श्री काली चरण कम्बोज” जो अब इस … more →