तीन कविताएं(१) मेरी आंखों में उमडते हुए समंदर की हरएक बुंद में तेरी तस्वीर बंद है . तेरी हरएक तस्वीर को मैं झांका करता हूं चोरी-चोरी, चूपके-चूपके । मेरे होठों पर कई दिनों से तितली बैठने नहीं आयी । मेर… more →
विजयकुमार दवे / Vijaykumar Daveदीपक भारतदीप wrote 1 year ago: बहुत दिन बाद ऑफिस में आये कर्मचारी ने पुराना कपडा उठाया और टेबल-कुर्सी और अलमारी पर धूल हटाने के लिए … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: इस सप्ताह मैंने कोई ऐसा पाठ या रचना नहीं लिखी जिसकी चर्चा की जा सके। वजह यह रही कि बरसात के मौसम में … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: चंद पलों की खुशी की खातिर पूरी जिन्दगी दाव पर लगा देना भला कौनसी अक्लमंदी है सब कुछ करते हैं हम अपने … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: अभी हुई है भोर शुरू कर दिया उन्होने शोर कैसे न होंगे दिन भर बोर जहाँ मौन रखकर ध्यान करना था वहाँ लगा … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: वादों के बादल बरसने का मौसम जब आता है यादों पर ग्रहण लग जाता है जजबातों के सौदागर तय करते हैं कि कौन … more →
vijaykumardave wrote 2 years ago: तीन कविताएं(१) मेरी आंखों में उमडते हुए समंदर की हरएक बुंद में तेरी तस्वीर बंद है . तेरी हरएक तस्वीर … more →
vijaykumardave wrote 2 years ago: क्षणिकायें चार विचार, चार क्षणिकाओँ में हमसफ़र नश्वर दुनिया को छोडकर चले जायें हम किसी शाश्वत सत्य की … more →
vijaykumardave wrote 2 years ago: मेरे ब्लोग के गुजराती मुलाकातियों के लिये मैं यहां मेरे मार्गदर्शक मित्र कविवर श्री सुरेन्द्र कडिया … more →
vijaykumardave wrote 2 years ago: कभी कस्ती, कभी तूफ़ां, कभी लहरें समंदर में; कई यादें, कई आंसू, कई चहरे समंदर में. वहां था पानी ही पान … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: शिष्य के हाथ से हुई पिटाई गुरुजी को मलाल हो गया जिसको पढ़ाया था दिल से वह यमराज का दलाल हो गया गुरुज … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: दोस्ती निभाने के वादे किये नही जाते निभाए जाते हैं। जुबान से कहने के मौक़े आते हैं हर दिन निभाने के … more →