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धूल ने क्लर्क को सिखाया-हिंदी शायरी

दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: बहुत दिन बाद ऑफिस में आये कर्मचारी ने पुराना कपडा उठाया और टेबल-कुर्सी और अलमारी पर धूल हटाने के लिए … more →

Tags: इंटरनेट, कविता, दीपक भारतदीप, मस्तराम, लेखक, व्यंग्य, सन्देश, साहित्य, हिन्दी पत्रिका

आम पाठक की प्रतिक्रिया की बन सकती है अंतर्जाल लेखकों की प्रेरणा-संपादकीय

दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: इस सप्ताह मैंने कोई ऐसा पाठ या रचना नहीं लिखी जिसकी चर्चा की जा सके। वजह यह रही कि बरसात के मौसम में … more →

Tags: Kavita, कविता, चिन्तन, शायरी, हास्य व्यंग्य, व्यंग्य, hasya, vyangya, bharat

यह कौनसी अक्लमंदी है-हास्य कविता 1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: चंद पलों की खुशी की खातिर पूरी जिन्दगी दाव पर लगा देना भला कौनसी अक्लमंदी है सब कुछ करते हैं हम अपने … more →

Tags: Kavita, हिंदी, कविता, शायरी, हास्य व्यंग्य, हास्य, व्यंग्य, hasya, vyangya

भोर में ही शुरू शोर -हिन्दी कविता साहित्य

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: अभी हुई है भोर शुरू कर दिया उन्होने शोर कैसे न होंगे दिन भर बोर जहाँ मौन रखकर ध्यान करना था वहाँ लग … more →

Tags: inglish, Kavita, हिंदी, कविता, चिन्तन, शायरी, हास्य व्यंग्य, व्यंग्य, vyangya

रौशनी और अँधेरे का व्यापार-हास्य कविता 1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: वादों के बादल बरसने का मौसम जब आता है यादों पर ग्रहण लग जाता है जजबातों के सौदागर तय करते हैं कि कौन … more →

Tags: arbic, अनुभूति, इंटरनेट, कविता, चिन्तन, व्यंग्य, शब्द, शायरी, शेर

तीन कविताएं

vijaykumardave wrote 1 year ago: तीन कविताएं(१) मेरी आंखों में उमडते हुए समंदर की हरएक बुंद में तेरी तस्वीर बंद है . तेरी हरएक तस्वीर … more →

Tags: हिन्दी, કવિતા, हमसफ़र, समंदर, आंख, कान, पारसमणि, बुत, सपना

चार विचार, चार क्षणिकाओँ में

vijaykumardave wrote 1 year ago: क्षणिकायें चार विचार, चार क्षणिकाओँ में हमसफ़र नश्वर दुनिया को छोडकर चले जायें हम किसी शाश्वत सत्य … more →

Tags: हिन्दी, કવિતા, क्षणिका, हमसफ़र, चुम्बन

मेरे ब्लोग के गुजराती मुलाकातियों के लिये

vijaykumardave wrote 1 year ago: मेरे ब्लोग के गुजराती मुलाकातियों के लिये मैं यहां मेरे मार्गदर्शक मित्र कविवर श्री सुरेन्द्र कडिया … more →

Tags: સુરેન્દ્ર કડિયા, ગુજરાતી કવિતા, કવિતા

समंदर में

vijaykumardave wrote 1 year ago: कभी कस्ती, कभी तूफ़ां, कभी लहरें समंदर में; कई यादें, कई आंसू, कई चहरे समंदर में. वहां था पानी ही पा … more →

Tags: समंदर, हिन्दी

अपने आंसू धीरे-धीरे बहाओ 1 comment

दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: शिष्य के हाथ से हुई पिटाई गुरुजी को मलाल हो गया जिसको पढ़ाया था दिल से वह यमराज का दलाल हो गया गुरुज … more →

Tags: hindi, dashbaord, Global dashbaord, inglish, विचार, हिंदी, कविता

कसमें, वादे क्या, इन पर भरोसा क्या? 1 comment

दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: दोस्ती निभाने के वादे किये नही जाते निभाए जाते हैं। जुबान से कहने के मौक़े आते हैं हर दिन निभाने के … more →

Tags: hindi, dashbaord, Global dashbaord, inglish, हिंदी, कविता, चिन्तन, शायरी


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