तुलसीदास को पढ़ने के बाद मुझे यही लगा कि एक निहायत ही पारदर्शी व्यक्तित्त्व के साथ समर्थकों और विरोधियों दोनों ने ही बहुत अन्याय किया है.समर्थक अन्याय :(1) तुलसीदास अवतारी पुरुष थे.(2) उनकी रामचरित मा… more →
वर्ड प्रेस पर आलसीpryas wrote 11 months ago: काशी में गंगा के तट पर एक संत का आश्रम था। एक दिन उनके एक शिष्य ने पूछा, ‘गुरुवर, शिक्षा का नि … more →
अफ़लातून wrote 11 months ago: कल सुबह कभी मेरे पड़ोसी प्रयाग पुरी चल बसे । मैं उन्हें बाबाजी बुलाता था । उनका अभिवादन होता था … more →