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सिलसिला गुनाह का1 comment

Rohit Jain wrote 8 months ago: ज़िंदगी है इक मुसलसल सिलसिला गुनाह का आपको दिखता नहीं तो ऐब है निगाह का आजकल के दौर की मिसाल है ये ता … more →

Tags: 2008 A Poetic Journey, मेरी गज़लें, Sep 2008, 2008, कविता, गुनाह, गज़ल, जैन, रोहित

आज तक उन खुशबुओं का सिलसिला तोड़ा नहीं6 comments

Rohit Jain wrote 1 year ago: आज तक उन खुशबुओं का सिलसिला तोड़ा नहीं दिल अपना जलाया मगर उसका दिल तोड़ा नहीं तुम भी देके देख लो, ग़म स … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2008 A Poetic Journey, apr 2008, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain

ड़ूबनेवाले को इक ही तिनके का सहारा काफ़ी है

Rohit Jain wrote 1 year ago: ड़ूबनेवाले को इक ही तिनके का सहारा काफ़ी है समझदार को कहते हैं बस एक इशारा काफ़ी है यूँ ही नहीं कहता हू … more →

Tags: 2008 A Poetic Journey, मेरी गज़लें, Jan 2008, 2008, इक, कविता, काफ़ी, को, गज़ल

यूँ इश्क़ का हमने दिया है इम्तिहां अक़्सर

Rohit Jain wrote 1 year ago: यूँ इश्क़ का हमने दिया है इम्तिहां अक़्सर मुँह में ज़ुबां होते हुए थे बेज़ुबां अक़्सर इश्क़ की तासीर ये सम … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2007 A Poetic Journey, Oct 2007, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain

नया हुनर पाने का वक़्त आया है

Rohit Jain wrote 1 year ago: नया हुनर पाने का वक़्त आया है उस को भुलाने का वक़्त आया है आओ बुझा दें पुरानी शम्मों को नई शम्में जलान … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2007 A Poetic Journey, Oct 2007, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain

इश्क़ हर इक का हल नहीं होता

Rohit Jain wrote 1 year ago: इश्क़ हर इक का हल नहीं होता मसला हर इक सरल नहीं होता तुझको देखा तो फिर यकीं आया फूल हर इक कँवल नहीं ह … more →

Tags: 2007 A Poetic Journey, मेरी गज़लें, Sep 2007, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain

दिल से आज दिल का फ़ासला हो गया

Rohit Jain wrote 1 year ago: दिल से आज दिल का फ़ासला हो गया मै ज़िंदगी से और आशना हो गया दोस्तों का इखलास परखने जो चला मै दुश्मनों … more →

Tags: 2007 A Poetic Journey, मेरी गज़लें, Jun 2007, हो, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit

कमज़ोर मै नहीं हूँ जंगों का दिल नहीं है

Rohit Jain wrote 1 year ago: कमज़ोर मै नहीं हूँ जंगों का दिल नहीं है देखा नहीं है जाता हारा हुआ ज़माना रखता है लाज देखो गुमराहियों … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2007 A Poetic Journey, May 2007, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain

चाँद दर्द का जला, दिल में उतरी चाँदनी

Rohit Jain wrote 1 year ago: चाँद दर्द का जला, दिल में उतरी चाँदनी तन्हाई ही छोड़ गई, जहाँ पे बिखरी चाँदनी ढ़ूंढ़ता ही रह गया सहर, श … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2007 A Poetic Journey, Mar 2007, में, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit

मस्जिदों में भी साक़ी का नाम लेता हूँ

Rohit Jain wrote 1 year ago: मस्जिदों में भी साक़ी का नाम लेता हूँ वूज़ू के वास्ते हाथों में जाम लेता हूँ नशा कराके तो सब ही गिराया … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2007 A Poetic Journey, Mar 2007, में, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit

वक़्त का मुसाफ़िर छीनकर सफ़हा मेरा ले जायेगा

Rohit Jain wrote 1 year ago: वक़्त का मुसाफ़िर छीनकर सफ़हा मेरा ले जायेगा वो इस ज़बाँ से उस ज़बाँ ये किस्सा ले जायेगा दुआ माँगी तो थी … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2007 A Poetic Journey, Feb 2007, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain

प्यार का आखरी अंदाज़ बाकी है1 comment

Rohit Jain wrote 1 year ago: प्यार का आखरी अंदाज़ बाकी है दिल तोड़ने का रिवाज़ बाकी है मौत के फ़रिश्तों ज़रा कुछ पल ठहरो मेरे आखरी नमा … more →

Tags: 2007 A Poetic Journey, मेरी गज़लें, JAN 2007, 2007, अंदाज़, आखरी, कविता, गज़ल, जैन


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