कितनी शिद्दत से उन्हे,दिल में बसाया इज़हार-ए-मोहोब्बत के लिए , जरासा रुके थे आँखों के सामने से,मेरा सरताज कोई और ले गया सोचने की जिद्द में,अपनी ज़िंदगी खो चुके थे. top post… more →
mehekmehhekk wrote 2 years ago: कितनी शिद्दत से उन्हे,दिल में बसाया इज़हार-ए-मोहोब्बत के लिए , जरासा रुके थे आँखों के सामने से,मेरा … more →