कल उन्मुक्त जी की इस चिट्ठी पर बडी दिलचस्प चर्चा पढने को मिली। एक तो वो दिल्ली में उनकी पसंदीदा किताबों की दुकान बुकवार्म बन्द होने से दुःखी थे और दूसरे अन्य किताबों की दुकानों पर सही माहौल ना होने को… more →
इन्द्रधनुषprithvi wrote 1 week ago: उस संदूक को कई दिनों से खोला नहीं था. आज सुबह सुबह पता नहीं क्यूं अचानक कैसे उसके पास पहुंच और कपड … more →
Nitin Bagla wrote 11 months ago: कल उन्मुक्त जी की इस चिट्ठी पर बडी दिलचस्प चर्चा पढने को मिली। एक तो वो दिल्ली में उनकी पसंदीदा किता … more →
Nitin Bagla wrote 1 year ago: अभी हाल ही में चेतन भगत की नयी पुस्तक “Three Mistakes of My Life” पढी। एक टाइमपास किताब … more →
Nitin Bagla wrote 1 year ago: दिसम्बर में हैदराबाद में एक पुस्तक मेला लगा था, जिसकी कि खबर मुझे मेले के आखिरी दिन लगी। किस्मत से उ … more →