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मै दिल की दीवारों से निकल आया हूँ7 comments

Rohit Jain wrote 8 months ago: मै दिल की दीवारों से निकल आया हूँ मै ग़म के नज़ारों से निकल आया हूँ मुजरिमों कि क़तारों से निकल आया हूँ … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2008 A Poetic Journey, Oct 2008, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain

Rajasthan BJP Government introduces Small Trader Friendly Proposals

khudra wrote 1 year ago: राजस्थान की भाजपा सरकार नें किराना व लघु व्यापारी समर्थन में कानूनी कदम उठाए Small traders and hawke … more →

Tags: राजस्थान, भाजपा, सरकार, नें, किराना, , लघु, व्यापारी, समर्थन

दुख के चेहरे पर लकीरें याद की5 comments

Rohit Jain wrote 1 year ago: दुख के चेहरे पर लकीरें याद की सुन रहा हूं सदा दिलेबरबाद की तेरी महफ़िल तेरा परचम ओ’ हुजूम अब कि … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2008 A Poetic Journey, Feb 2008, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain

एक पल में ही हज़ारों मुद्दतों की बात हो1 comment

Rohit Jain wrote 1 year ago: एक पल में ही हज़ारों मुद्दतों की बात हो ज़हन में जो ले रहीं उन करवटों की बात हो आओ बोलें प्यार के इख़ला … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2008 A Poetic Journey, Feb 2008, एक, पल, में, ही, हज़ारों, मुद्दतों

काटे हैं इन्सान ने दिल की रगों से खंजर कई

Rohit Jain wrote 1 year ago: काटे हैं इन्सान ने दिल की रगों से खंजर कई दिल की हिम्मत से सुनो झुक जाते हैं लश्कर कई ये जो मतलबी जह … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2008 A Poetic Journey, Jan 2008, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain

मुझसे भी रकीबों की तरह बात ना करो

Rohit Jain wrote 1 year ago: मुझसे भी रकीबों की तरह बात ना करो मेरी ही बाज़ी में मुझे तुम मात ना करो इक बार तो कह दो मुझे तुम अपना … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2008 A Poetic Journey, Jan 2008, बात, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit

वो नहीं क़ातिल ये तो खंजर की ख़ता थी

Rohit Jain wrote 1 year ago: वो नहीं क़ातिल ये तो खंजर की ख़ता थी वो कहाँ बदले मेरी नज़र की ख़ता थी उस ही की दीवारें ज़रा मजबूत नहीं थ … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2007 A Poetic Journey, Oct 2007, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain

बिखरे हुए से फूलों में तूफ़ान की खुशबू आई है1 comment

Rohit Jain wrote 1 year ago: बिखरे हुए से फूलों में तूफ़ान की खुशबू आई है इक गद्दार ग़रेबां से ईमान की खुशबू आई है हमने ये ना जाना … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2007 A Poetic Journey, Sep 2007, में, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit

दिल को उनके आने की उम्मीद सी है

Rohit Jain wrote 1 year ago: दिल को उनके आने की उम्मीद सी है कुछ करम हो जाने की उम्मीद सी है हाथ में जाम लिये बैठा हूँ आँखों से म … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2007 A Poetic Journey, Sep 2007, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain

अश्क़ गिनता है मेरे आज मुनाफ़े की तरह

Rohit Jain wrote 1 year ago: अश्क़ गिनता है मेरे आज मुनाफ़े की तरह ज़िंदगी आँखों से गुज़रती है जनाज़े की तरह आज वो ही दर मुझे लगता है … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2007 A Poetic Journey, Sep 2007, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain


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