दुनिया की चिन्ता छोटी सी दुनिया बड़े-बड़े इलाके हर इलाके के बड़े-बड़े लड़ाके हर लड़ाके की बड़ी-बड़ी बन्दूकें हर बन्दूक… more →
अनहद नादअफ़लातून wrote 1 year ago: जल्दी में प्रियजन मैं बहुत जल्दी में लिख रहा हूं क्योंकि मैं बहुत जल्दी में हूं लिखने की जिसे आप भी … more →
अफ़लातून wrote 1 year ago: अजीब वक्त है - बिना लड़े ही एक देश- का देश स्वीकार करता चला जाता अपनी ही तुच्छताओं की अधीनता ! कुछ तो … more →
अफ़लातून wrote 1 year ago: प्रियजन मैं बहुत जल्दी में लिख रहा हूं क्योंकि मैं बहुत जल्दी में हूं लिखने की जिसे आप भी अगर समझने … more →
PRIYANKAR wrote 2 years ago: दुनिया की चिन्ता छोटी सी दुनिया बड़े-बड़े इलाके हर इलाके के … more →
PRIYANKAR wrote 2 years ago: यकीनों की जल्दबाज़ी से एक बार खबर उड़ी कि कविता अब कविता नहीं रही और यूं फैली कि कविता अब नहीं रही ! … more →
PRIYANKAR wrote 2 years ago: उदासी के रंग उदासी भी एक पक्का रंग है जीवन का उदासी के भी तमाम रंग होते हैं जैसे फ़क्कड़ जोगिया पत … more →
PRIYANKAR wrote 2 years ago: कभी पाना मुझे तुम अभी आग ही आग मैं बुझता चिराग हवा से भी अधिक अस्थिर हाथों से पकड़ता एक किरण का स … more →
PRIYANKAR wrote 2 years ago: जिस समय में जिस समय में सब कुछ इतनी तेजी से बदल रहा है वही समय मेरी प्रतीक्षा में न जाने कब से … more →
PRIYANKAR wrote 3 years ago: दीवारें अब मैं एक छोटे-से घर और बहुत बड़ी दुनिया में रहता हूं कभी मैं एक बहुत बड़े घर और छोटी- … more →