करो हमको न शर्मिंदा बढ़ो आगे कहीं बाबा हमारे पास आँसू के सिवा कुछ भी नहीं बाबा कटोरा ही नहीं है हाथ में बस इतना अंतर है मगर बैठे जहाँ हो तुम खड़े हम भी वहीं बाबा तुम्हारी ही तरह हम भी रहे हैं आज तक प्… more →
चौपालSatish Chandra satyarthi wrote 10 months ago: – कुंवर बेचैन दो दिलों के दरमियाँ दीवार-सा अंतर न फेंक चहचहाती बुलबुलों पर विषबुझे … more →