महिला दिवस के अवसर पर जानी-अनजानी सभी महिलाओं को बधाई के साथ शुभकामनाएं कि वह जिस भी क्षेत्र में हों दिन-दुनी रात-चौगुनी तरक्की कर अपना व अपनों का नाम रौशन करें नारी झलकती है, तुम्हारे विचारों से चट… more →
आवारा बंजारासंजीत त्रिपाठी wrote 2 years ago: महिला दिवस के अवसर पर जानी-अनजानी सभी महिलाओं को बधाई के साथ शुभकामनाएं कि वह जिस भी क्षेत्र में हो … more →
संजीत त्रिपाठी wrote 2 years ago: कभी-कभी क्यों होता है ऐसा कभी-कभी कि कुछ सोचना भी भारी लगे और सोचे बिना रहा न जाए! क्यों होता है ऐस … more →
संजीत त्रिपाठी wrote 2 years ago: मैत्री मित्रता करोगे क्या तुम मुझसे कहते हो यदि तुम हां तो चलो! चलें मिलकर हम पार क्षितिज के! स्वीका … more →
संजीत त्रिपाठी wrote 2 years ago: एक राम! तुम भगवान न थे तुम तो थे,प्रतीक मात्र और हो! दीन-हीन जनों के संबल का विश्वास का! उस धर्म-मर् … more →
संजीत त्रिपाठी wrote 2 years ago: कब आओगे श्याम हे श्याम तुम कब आओगे, प्रतीक्षारत है मेरा मन। बीते कितने ही वर्ष, बीती न जाने कितनी … more →
संजीत त्रिपाठी wrote 2 years ago: आस-पास घट रहा है, आस-पास मेरे ऐसा कुछ जिसे मैं देख तो रहा हूं, बस! व्यक्त नहीं कर पाता। ऐसा नहीं है … more →
संजीत त्रिपाठी wrote 2 years ago: कौन हो तुम.. शीशे में एक अक्स सा लहराया था, गौर से देखा तो हमारी परछाई नहीं,तस्वीर थी तेरी । राह में … more →