कुमार अम्बुज की एक कविता दुनियादार आदमी उसके पास वक़्त होता है कि वह सबसे नमस्कार करता हुआ पूछ सके – ‘ कहो, कैसे हो ? ‘ पड़ोसी के दुख के बारे में वह मुस्कराकर जानकारी लेता है… more →
अनहद नादPRIYANKAR wrote 1 year ago: कुमार अम्बुज की एक कविता किवाड़ ये सिर्फ़ किवाड़ नहीं हैं जब ये हिलते हैं माँ हिल जाती है और चौ … more →
PRIYANKAR wrote 1 year ago: कुमार अम्बुज की एक कविता दुनियादार आदमी उसके पास वक़्त होता है कि वह सबसे नमस्कार करता हुआ प … more →
PRIYANKAR wrote 1 year ago: कुमार अम्बुज की एक कविता एक कम है अब एक कम है तो एक की आवाज कम है एक का अस्तित्व एक का प्रकाश … more →