दिल के ख़ाब दिल में ही सुलगते हैं हक़ीक़त के निशाँ अभी दूर लगते हैं हल्की-हल्की आवाज़ें कानों में गुनगुनाती हैं लगता है कहीं दूर हवाएँ गीत गाती हैं देखो न कितनी भोली-भाली सूरतें हैं हवा के संग फूलों के ग… more →
तख़लीक़-ए-नज़रamitabhtri wrote 1 year ago: हम आतंकवाद से नहीं बजरंग दल से लडेंगे अमिताभ त्रिपाठी भारत के प्रधानमंत्री द्वारा डा मनमोहन सिंह द्व … more →
विनय wrote 1 year ago: दिल के ख़ाब दिल में ही सुलगते हैं हक़ीक़त के निशाँ अभी दूर लगते हैं हल्की-हल्की आवाज़ें कानों में गुनगु … more →