रामधारी सिंह “दिनकर” प्रथम सर्ग वह कौन रोता है वहाँ-इतिहास के अध्याय पर, जिसमें लिखा है, नौजवानों के लहु का मोल है प्रत्यय किसी बूढे, कुटिल नीतिज्ञ के व्याहार का; जिसका हृदय उतना मलिन जितन… more →
हिन्दी साहित्यwrote 2 years ago: रामधारी सिंह “दिनकर” प्रथम सर्ग वह कौन रोता है वहाँ-इतिहास के अध्याय पर, जिसमें लिखा है, … more →