मै जब खाली पेट था भूखा ! सिर्फ भूखा ! नहीं जानता था क्या होता है सिर दर्द दिल मे लिये फिरता था सिर्फ प्यार का दर्द हाँ अब, जब खट्टी डकारे लेता हूं कल का भोजऩ कोई छीन न ले इस चिन्ता मे व्यस्त रहता … more →
हरिहर झाHarihar Jha हरिहर झा wrote 2 years ago: मै जब खाली पेट था भूखा ! सिर्फ भूखा ! नहीं जानता था क्या होता है सिर दर्द दिल मे लिये फिरता था सिर … more →
Harihar Jha हरिहर झा wrote 2 years ago: संपादकीय टिप्पणी : हरिहर झा की कविता द्वन्द्व के उस दर्द को बयान करती है जो अपनी जमीन से कटने और स … more →
Harihar Jha हरिहर झा wrote 2 years ago: चलो फिर इस दिखावे के यंत्रवत् जीवन से दूर पिकनिक पर संगी साथियों की टोली ले कर समस्त औपचारिक वेशभूषा … more →