सघन कुंज भवन आज फूलन की मंडली रचि ता मधि लै संग राधा बैठे गिरिधरनलाल। चूनरी की बांधि पाग अंग बागो चूनरी को उपरेना कंठ हीरा हार मोती माल॥१॥ स्याम चूरी हरित लहँगा पहरि चूनरि झूमक सारी मानो गनगौर बनी ऐन … more →
पुष्टिमार्गpushtimarg wrote 1 year ago: सघन कुंज भवन आज फूलन की मंडली रचि ता मधि लै संग राधा बैठे गिरिधरनलाल। चूनरी की बांधि पाग अंग बागो चू … more →
pushtimarg wrote 1 year ago: नंद घरुनि वृषभान घरुनि मिलि कहति सबन गनगौर मनाओ। नये बसन आभूषन पहरो मंगल गीत मनोहर गाओ॥१॥ करि टीकौ न … more →
pushtimarg wrote 1 year ago: रंगीली तीज गनगौर आज चलो भामिनी कुंज छाक लै जैये। विविध भांति नई सोंज अरपि सब अपने जिय की तृपत बुझैये … more →
pushtimarg wrote 1 year ago: नवल निकुंज महेल मंदिर में जेंवन बैठे कुंवर कन्हाई। भरि भरि डला सीस धरि अपने व्रजबधू तहाँ छाक लै आई॥१ … more →
pushtimarg wrote 1 year ago: कहत जसोदा सब सखियन सों आवो बैठो मंगल गावो। है गनगौर की तीज रंगीली कान्ह कुंवर को लाड लडावो॥१॥ ललिता … more →
pushtimarg wrote 1 year ago: लाल गोपाल गुलाल हमारी आँखिन में जिन डारो जू। बदन चन्द्रमा नैन चकोरी इन अन्तर जिन पारो जू ॥१॥ गावो रा … more →
pushtimarg wrote 1 year ago: मंगला दर्शन के समय खेलत वसंत निस पिय संग जागी। सखी वृंद गोकुल की सोभा गिरिधर पिय पदरज अनुरागी॥१॥ नवल … more →
pushtimarg wrote 1 year ago: (मंगला समय) आज कछु देखियत ओर ही बानक प्यारी तिलक आधे मोती मरगजी मंग। रसिक कुंवर संग अखारे जागी सजनी … more →
pushtimarg wrote 1 year ago: तरणि तनया तीर आवत हें प्रात समे गेंद खेलत देख्योरी आनंद को कंदवा। काछिनी किंकणि कटि पीतांबर कस बांधे … more →
pushtimarg wrote 2 years ago: लीला लाल गोवर्धनधर की। गावत सुनत अधिक रुचि उपजत रसिक कुंवर श्री राधावर की॥१॥ सात द्योस गिरिवर कर धार … more →
pushtimarg wrote 2 years ago: परम कृपाल श्री वल्लभ नंदन करत कृपा निज हाथ दे माथे । जे जन शरण आय अनुसरही गहे सोंपत श्री गोवर्धननाथ … more →
pushtimarg wrote 2 years ago: फल्यो जन भाग्य पथ पुष्टि प्राकट करण दुष्ट पाखंड मत खंड खंडन किये । सकल सुख घोष को तिमिर हर लोक को कृ … more →
pushtimarg wrote 2 years ago: नवल वसंत नवल वृंदावन खेलत नवल गोवर्धनधारी । हलधर नवल नवल ब्रजबालक नवल नवल बनी गोकुल नारी ॥२। नवल यमु … more →
pushtimarg wrote 2 years ago: श्री गिरिधर लाल की बानिक ऊपर आज सखी तृण टूटे री । चोवा चंदन अबीर कुंकुमा पिचकाइन रंग छूटे री ॥१॥ लाल … more →
pushtimarg wrote 2 years ago: शरण प्रतिपाल गोपाल रति वर्धिनी । देत पिय पंथ कंथ सन्मुख करत , अतुल करुणामयी नाथ अंग अर्द्धिनी ॥१॥ दी … more →